भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त विदेशियों के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक सहित छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। आशंका है कि अभी कई अन्य विदेशी नागरिक भारत में छिपे हो सकते हैं जिनकी तलाश में देश की सभी सुरक्षा एजेंसियाँ जुटी हुई हैं। पिछले साल मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने राज्य विधानसभा में कहा था “हमारे पास पुख्ता खुफिया जानकारी है कि यूक्रेन युद्ध के अनुभवी सैनिक मिजोरम के रास्ते म्यांमार के चिन राज्य गए थे ताकि सैन्य जुंटा से लड़ रहे विद्रोही संगठनों को प्रशिक्षण दे सकें।” पूर्वोत्तर राज्यों में विदेशी पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि पर देखी गई है पश्चिमी देशों से लगभग 2,000 पर्यटक पूर्वोत्तर में आए परंतु आइजोल में मुश्किल से कुछ ही विदेशी पर्यटक दिखाई दिए। इसका मतलब बिना किसी होटल बुकिंग के रह रहे थे जिसमे किसी लोकल सपोर्ट के बिना संभव नहीं है देश विरोधी कार्यों में लगे विदेशी वहाँ किसी लोकल को फन्डिंग करते है या कुछ लालच देखर देश विरोधी कार्यों में सामिल करते है अमेरिका, कनाडा, यूक्रेन,पश्चिम के कुछ देशों के नागरिक जो पहले भारत के पूर्वोत्तर राज्यों या म्यांमार, बांग्लादेश, नेपाल के नागरिक थे उनको इस्तेमाल कर रहे है जिससे भारत सरकार को पता न चले और वे सभी नागरिक भारत के इन क्षेत्रों से अच्छे से परिचित है जो उनको कार्य में सहायक होंगे।
इन सभी पर भारत के खिलाफ साजिश रचने और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। मैथ्यू वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन चेकिंग (Emigration Check) के दौरान संदेह के आधार पर रोका गया। पूछताछ में भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के संकेत मिले, जिसके बाद देशभर में अलर्ट जारी किया गया। वैनडाइक ने कथित तौर पर सत्तावादी शासनों के खिलाफ गुप्त अभियान चलाने का दावा किया है। इसके बाद तीन-तीन यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया। यह गिरफ्तारी एक गंभीर सुरक्षा चिंता की ओर इशारा करती है। आरोप है कि ये सभी विदेशी नागरिक भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पहुँचकर अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश करते थे और वहाँ के विद्रोहियों को ड्रोन वॉरफेयर, हथियार संचालन और युद्ध तकनीकों की ट्रेनिंग दे रहे थे। वैनडाइक ने एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “वेनेजुएला, बर्मा (म्यांमार), ईरान और अन्य सत्तावादी शासनों के नेताओं, हम आपके पास आ रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “रूस, हम आपके पास भी आ रहे हैं।
भारत में प्रतिबंधित क्षेत्र (RAP और PAP)
भारत में कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में जाने के लिए विदेशियों को विशेष अनुमति लेनी होती है, जिसे RAP (Restricted Area Permit) और PAP (Protected Area Permit) कहा जाता है। नियम राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और जनजातीय संस्कृति की रक्षा के लिए बनाए गए हैं। ऐसे क्षेत्र में जाने के लिए भूटान के नागरिकों को भी छूट प्राप्त है। आवेदन: e-FRRO पोर्टल https://indianfrro.gov.in/eservices/userlogin.jsp?disclaimer=1के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
RAP (Restricted Area Permit):
यह परमिट अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक होता है
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (कुछ विशेष द्वीप)
- लक्षद्वीप द्वीप समूह
PAP (Protected Area Permit):
यह सीमा से लगे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए आवश्यक होता है, इसमे संपूर्ण राज्य (PAP) में आते है जैसे:
- अरुणाचल प्रदेश
- सिक्किम (कुछ सीमावर्ती क्षेत्र)
- मणिपुर
- मिजोरम
- नागालैंड
- आंशिक राज्य/क्षेत्र हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान (सीमावर्ती इलाके), और उत्तराखंड के कुछ संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में आते है।
इन क्षेत्रों में बिना अनुमति प्रवेश, फोटोग्राफी या संवेदनशील जानकारी साझा करना दंडनीय है। विदेशी नागरिकों को भारत सरकार/राज्य सरकार या FRRO (Foreigners Regional Registration Office) के माध्यम से पासपोर्ट, वीज़ा और यात्रा विवरण जमा कर अनुमति लेनी होती है।
आरोप और जांच
गिरफ्तार किए गए 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक पर आरोप है कि वे वैध वीज़ा पर भारत आए, लेकिन प्रतिबंधित क्षेत्रों (विशेष रूप से मिजोरम) में अवैध रूप से प्रवेश किया। वहाँ से वे म्यांमार जाकर सशस्त्र जातीय समूहों से संपर्क में थे। इन पर आरोप है कि वे:
- ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग दे रहे थे
- हथियार संचालन सिखा रहे थे
- युद्ध तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहे थे
जांच में यह भी सामने आया है कि इनके कुछ संपर्क भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय प्रतिबंधित संगठनों से भी थे।
गिरफ्तारी के दौरान ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। NIA के अनुसार, ये लोग यूरोप से ड्रोन की खेप भारत के रास्ते म्यांमार भेजने की साजिश में शामिल थे। इनके ट्रैवल रूट, फंडिंग और नेटवर्क की जांच जारी है।
मैथ्यू वैनडाइक कौन है?
मैथ्यू वैनडाइक (Matthew VanDyke) एक अमेरिकी व्यक्ति हैं, जिन्हें आम तौर पर युद्ध क्षेत्रों में सक्रिय रहने, डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने और स्वयंसेवी लड़ाकों को ट्रेनिंग देने के लिए जाना जाता है। वे एक फिल्ममेकर (Documentary Filmmaker) और लेखक हैं, जो संघर्ष (conflict zones) वाले इलाकों में काम करने के लिए प्रसिद्ध हैं।
मैथ्यू वैनडाइक 2011 के लीबिया युद्ध के दौरान गद्दाफी शासन के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों के साथ जुड़ने के कारण करीब 6 महीने तक जेल में रहे। इसके बाद वे ISIS के खिलाफ गतिविधियों से जुड़े और विदेशी स्वयंसेवकों को ट्रेनिंग देने का काम किया। उन्होंने “Sons of Liberty International (SOLI)” नाम का संगठन भी शुरू किया।मैथ्यू वैनडाइक का भारत में रहना इस संदेह को बल देता है कि क्या बाहरी ताकतें भारत की आंतरिक सीमाओं को अस्थिर कर एक नया ‘बफर स्टेट’ बनाने की कोशिश कर रही हैं। यदि विदेशी नागरिक यहाँ के उग्रवादी समूहों को ड्रोन तकनीक और आधुनिक युद्ध कौशल सिखा रहे हैं, तो यह भारतीय सेना के लिए “असममित युद्ध” (Asymmetric Warfare) की चुनौती पेश करता है। यूक्रेन ने अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर विरोध जताया है और उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की है। अमेरिका ने इस मामले पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पूर्वोत्तर भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों को अलग कर ‘अलग देश’ बनाने की CIA की साजिश (दावा)
पूर्वोत्तर भारत, विशेष रूप से मिजोरम और मणिपुर, वर्तमान में म्यांमार के गृहयुद्ध और जातीय तनाव के कारण अत्यंत संवेदनशील हैं। पूर्वोत्तर के कई राज्यों (जैसे मिजोरम, नागालैंड, मेघालय) में ईसाई आबादी अधिक है, जिनमें से अधिकांश ऐतिहासिक रूप से ब्रिटिश काल में मिशनरियों के प्रभाव से धर्म परिवर्तन होता आ रहा है।
CIA (Central Intelligence Agency) अमेरिका की खुफिया एजेंसी है जिसके बारे में समय समय पर यह दावा किया जाता है कि पूर्वोत्तर भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों को अलग कर एक “सेपरेट क्रिश्चियन स्टेट” बनाने की योजना हो सकती है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी इसके बारे में कहा गया है कि उन्होंने उल्लेख किया था कि अमेरिका बांग्लादेश में अपना बेस बनाना चाहता था, ताकि पूर्वोत्तर भारत, म्यांमार और बांग्लादेश पर नजर रख सके और भविष्य में रणनीतिक कदम उठा सके।

भारत के पूर्वोत्तर राज्य, म्यांमार और बांग्लादेश लंबे समय से अस्थिर रहे हैं। यह एक संयोग है या किसी बड़े भू-राजनीतिक प्रयोग का हिस्सा—यह समय ही बताएगा। इन क्षेत्रों के बारे में समय-समय पर सोशल मीडिया और कुछ खुफिया रिपोर्टों में चर्चाएँ सामने आती रही हैं। भारत और म्यांमार के बीच लगभग 1600 किमी लंबी खुली सीमा है, जो सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है। म्यांमार में जारी संघर्ष के कारण शरणार्थियों के साथ-साथ उग्रवादियों का आना-जाना भी आसान हो गया है। विदेशी नागरिकों का संरक्षित क्षेत्रों में बिना अनुमति प्रवेश यह संकेत देता है कि स्थानीय नेटवर्क और विदेशी तत्व मिलकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हो सकते हैं। कुछ महीने पहले, इसी अकाउंट से एक संदेश पोस्ट किया गया था जिसमें कहा गया था कि लेखक एक संघर्ष क्षेत्र में है। उसने स्पॉटिफाई पर बातचीत के लिए स्टारलिंक का उपयोग करने का भी जिक्र किया था।
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय द्वारा अपने नागरिकों के बचाव में लगातार बयान जारी किया जा रहा है की उत्तर-पूर्व में प्रतिबंधित क्षेत्र में आरोपियों की उपस्थिति एक “अनजाने में हुई चूक” हो सकती है। अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि वे “स्थिति से अवगत” हैं, लेकिन गोपनीयता कारणों से अमेरिकी नागरिकों से जुड़े मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकते है।
भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
कुछ चुनौतियाँ जो सामने आती हैं बिना प्रॉफिलिंग के सभी को वीजा देना और सही से जांच न करना विदेशियों को हिम्मत देता है। देश की सुरक्षा एजेंसी सही से काम करे तो ऐसे खतरों को समय से टाला जा सकता है मैथ्यू वैनडाइक जैसे लोगों का भारत में आना और वीजा मिलना यह दर्शाता है सब भगवान भरोसे चल रहा रहा है।
- आसान वीज़ा नियमों का दुरुपयोग
- ओवरस्टे (Overstay) के बाद भी विदेशियों का रुकना
- सभी यात्रियों की रियल-टाइम निगरानी का अभाव
- होटल बुकिंग (Form C) का सही रिकॉर्ड न होना, बिना होटल बुकिंग यात्री को भारत मे प्रवेश देना
- एयरपोर्ट पर अत्यधिक भीड़ और अधिकारियों पर दबाव होने से आसानी से क्लीरन्स मिलना
- सुरक्षा कमियों का फायदा उठाकर कुछ विदेशी नागरिक सुरक्षा तंत्र से बच निकलते हैं।
- इमग्रैशन क्लीरन्स के दौरान सही से जांच का करना
- इमग्रैशन अधिकारियों को एक सुरक्षा एजेंसी की तरह तैयार किया जाए और अत्यधिक अधिकार दिए जाए जिससे किसी भी स्थित में ऐसे देश विरोधी ताकतों से निपटा जा सके।
निष्कर्ष (Conclusion)
यह घटना भारत के लिए एक चेतावनी है कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। साथ ही, विदेशी नागरिकों की गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखना और सख्त नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। दिसंबर 2024 में, खुफिया जानकारी के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड के प्रशासन को म्यांमार से सटी सीमाओं पर आने वाले विदेशियों पर कड़ी नजर रखने के लिए सतर्क किया था। मणिपुर में चल रहे जातीय संघर्ष के कारण भारत सरकार पहले से ही अलर्ट पर है और इन क्षेत्रों में किसी भी विदेशी नागरिक के प्रवेश पर कड़ी निगरानी रख रही है। कई विदेशी यात्रियों पर सरकार पहले ही कार्रवाई कर चुकी है।
भारत की स्थिति वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में काफी मजबूत है और देश तेजी से विकास कर रहा है। ऐसे में कुछ ताकतें चाहती हैं कि भारत अपने आंतरिक मुद्दों में उलझा रहे, जिससे वह विदेशी दबाव के आगे झुकने को मजबूर हो जाए। भारत ने अपने कई बड़े मुद्दों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया है, चाहे वह कश्मीर का मुद्दा हो या नक्सलवाद का। अब भारत का लक्ष्य तेजी से विकास करना और दुनिया में अमेरिका, चीन और रूस जैसे शक्तिशाली देशों की श्रेणी में आगे बढ़ना है, क्योंकि आज के समय में बिना ताकत के किसी देश का वैश्विक स्तर पर प्रभाव सीमित रह जाता है। वर्तमान परिस्थितियों में भारत की सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सतर्कता से कार्य करने की आवश्यकता है, ताकि देश विरोधी ताकतों के मंसूबों को समय रहते विफल किया जा सके।
भारत में Bureau of Immigration (BoI), गृह मंत्रालय के तहत कार्य करने वाली एक प्रमुख एजेंसी है, जो वर्ष 1971 से देश के सभी इमिग्रेशन चेक पोस्ट (ICPs) — जैसे हवाई अड्डों, बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं — पर आव्रजन सेवाओं का प्रबंधन कर रही है। ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन एक स्वतंत्र विभाग नहीं है, बल्कि यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इसके अंतर्गत कार्य करने वाले कई अधिकारी और कर्मचारी विभिन्न राज्यों और सेवाओं से प्रतिनियुक्ति (deputation) पर निश्चित अवधि के लिए आते हैं FRRO (Foreigners Regional Registration Office) भी प्रतिनियुक्ति (deputation) पर आता है ऐसी व्यवस्था के कारण कभी-कभी समन्वय (coordination) और जवाबदेही (accountability) से जुड़े प्रश्न उठते हैं। इमिग्रेशन प्रणाली में कई अलग-अलग विभागों की भूमिकाएं होती हैं—जैसे पासपोर्ट विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी किया जाता है, वीजा गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन होता है, जबकि इमिग्रेशन जांच BOI द्वारा की जाती है। BOI का प्रशासन IB देखती है।
एयरपोर्ट संचालन का कार्य एयरपोर्ट अथॉरिटी के जुम्मे है जिनका मुख्य फोकस यात्री सुविधा और संचालन की दक्षता (efficiency) पर होता है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना विभिन्न सरकारी एजेंसियों की संयुक्त जिम्मेदारी होती है।इन सभी पहलुओं को देखते हुए यह आवश्यक है कि इमिग्रेशन व्यवस्था को और अधिक मजबूत, समन्वित और जवाबदेह बनाया जाए। इसके लिए भारत सरकार द्वारा समय-समय पर समीक्षा (review) और आवश्यक सुधार (reforms) किए जाना देश की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। BOI कोई एक पूर्ण डिपार्टमेंट बनाया जाए जिससे सभी की जवावदेही सुनिश्चित किया जा सके।

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