इन देशों की यात्रा से पहले पोलियो पीना जरूरी, पोलियो(Poliomyelitis) से बचने के लिए WHO ने जारी किए निए नियम, विस्तृत रिपोर्ट…

Global Polio surveillance data and WHO reports
Global Polio surveillance data and WHO reports
Polio vaccination requirements for international travel

विश्व में पोलियो(Poliomyelitis) की वर्तमान स्थिति (WHO के अनुसार) विस्तृत रिपोर्ट….

पोलियो (Poliomyelitis) एक अत्यंत संक्रामक वायरल रोग है, जो पोलियो वायरस (Poliovirus) के कारण होता है। यह रोग मुख्य रूप से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करता है यह तंत्रिका तंत्र पर हमला करके घंटों के भीतर अपरिवर्तनीय पक्षाघात (लकवा) का कारण बन सकती है। इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसे सुरक्षित टीकों से पूरी तरह रोका जा सकता है।और गंभीर मामलों में स्थायी लकवा (Paralysis) या मृत्यु का कारण बन सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ (UNICEF), ग्लोबल पोलियो उन्मूलन पहल (GPEI) और विभिन्न देशों की सरकारों के संयुक्त प्रयासों से पोलियो को दुनिया के अधिकांश हिस्सों से समाप्त कर दिया गया है। सभी अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों के पास इन देशों की यात्रा से पहले पोलिओ पीना जरूरी है और Yellow Fever card पर एंट्री होना चाहिए अन्यथा इमिग्रेशन (Immigration) पर आपको रोक जा सकता है।

Yellow Fever card  https://garethi.com/yellow-fever/ पूरी जानकारी यहाँ देखें 

 पोलियो क्या है?

पोलियो (Poliomyelitis एक वायरल संक्रमण है जो संक्रमित व्यक्ति के मल, दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैलता है। पोलियो (Poliomyelitis) प्रमुख लक्षण क्या है ?

  1. बुखार
  2. थकान
  3. सिरदर्द
  4. उल्टी
  5. गर्दन में अकड़न
  6. हाथ-पैरों में दर्द
  7. गंभीर मामलों में स्थायी लकवा

पोलियो (Poliomyelitis) संक्रमण फैलने के मुख्य कारण

  1. दूषित पानी और भोजन
  2. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से
  3. खराब स्वच्छता और सफाई

 विश्व में पोलियो की वर्तमान स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वर्तमान में Wild Poliovirus Type-1 (WPV1) केवल दो देशों में स्थानिक (Endemic) है

क्रम देश स्थिति
1 अफगानिस्तान पोलियो स्थानिक
2 पाकिस्तान पोलियो स्थानिक

ये दोनों देश दुनिया के अंतिम ऐसे देश हैं जहाँ जंगली पोलियो वायरस का स्थानीय संचरण अभी भी जारी है। वर्तमान स्थिति में अफगानिस्तान में पोलियो के मामलों में कमी आई है, लेकिन वायरस का पूर्ण उन्मूलन अभी बाकी है।

पाकिस्तान में पोलियो की स्थिति बहुत खराब है प्रमुख प्रभावित क्षेत्र

  1. खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa)
  2. बलूचिस्तान
  3. सिंध के कुछ हिस्से

 वैक्सीनव्युत्पन्न पोलियो (cVDPV) क्या है? इसका पूर्ण नाम Circulating Vaccine-Derived Poliovirus (cVDPV) यह पोलियो वायरस का एक परिवर्तित रूप है, जो अत्यंत कम टीकाकरण कवरेज वाले क्षेत्रों में उत्पन्न हो सकता है।

कैसे उत्पन्न होता है?

ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) में कमजोर जीवित वायरस होता है। यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय तक पर्याप्त टीकाकरण न हो, तो यह कमजोर वायरस समुदाय में फैलते हुए उत्परिवर्तित (Mutate) हो सकता है।

इन प्रभावित देशों में समय-समय पर निम्न क्षेत्रों में cVDPV के मामले देखे गए हैं:

  1. नाइजीरिया
  2. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य
  3. यमन
  4. सोमालिया
  5. चाड
  6. मोजाम्बिक

कुछ अन्य अफ्रीकी और एशियाई देश (ध्यान दें कि ये देश Wild Polio Endemic Countries नहीं हैं।)

पोलियोप्रभावित देशों की यात्रा से पहले टीकाकरण करवाना क्यों जरूरी है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यदि कोई यात्री ऐसे देश की यात्रा करता है जहाँ पोलियो वायरस का प्रसार (Transmission) हो रहा है, तो उसे यात्रा से पहले पोलियो टीकाकरण संबंधी नियमों का पालन करना आवश्यक है।

  1. पोलियो बूस्टर डोज (Booster Dose) यात्रा से कम से कम 4 से 6 सप्ताह पहले पोलियो वैक्सीन की एक बूस्टर खुराक (OPV या IPV) लेना आवश्यक है।
  2. यह बूस्टर डोज यात्रा की तारीख से 12 महीने के भीतर ली गई होनी चाहिए।
  3. टीकाकरण का प्रमाण International Certificate of Vaccination (Yellow Card) में दर्ज होना चाहिए।
  4. पोलियो बूस्टर डोज लेने का मुख्य कारण पोलियो वायरस के अंतरराष्ट्रीय प्रसार को रोकना।
  5. यात्रियों और गंतव्य देश की आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  6. WHO के अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों (IHR) का पालन करना।

भारत की पोलियो यात्रा और भारत में पोलियो का इतिहास

भारत कभी दुनिया में पोलियो से सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक था। भारत की पोलियो के खिलाफ यात्रा सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) के इतिहास में दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे सफल जीतों में से एक है। एक समय जिस देश को वैश्विक पोलियो का सबसे बड़ा केंद्र (Epicenter) माना जाता था, उसने दृढ़ संकल्प और बेहतरीन रणनीति के बल पर खुद को पोलियो मुक्त बनाया।

शुरुआती प्रयास: भारत सरकार ने 1979 में विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (EPI) के तहत ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) देना शुरू किया था, लेकिन अत्यधिक आबादी और कम प्रभावकारिता के कारण मामले कम नहीं हो रहे थे। पल्स पोलियो अभियान: साल 1994 में दिल्ली सरकार ने और इसके बाद साल 1995 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर पल्स पोलियो प्रतिरक्षण कार्यक्रम (Pulse Polio Immunization Programme ) की शुरुआत की। दो बूंद जिंदगी की: इस नारे के साथ महाअभियान चलाया गया, जिसका लक्ष्य 5 वर्ष तक के हर बच्चे को कवर करना था। दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क: इस अभियान के तहत 24 लाख से अधिक वॉलंटियर्स/टीकाकरण कर्मी और 1.5 लाख से अधिक सुपरवाइजर शामिल किए गए। रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, मेलों और बाजारों (ट्रांजिट पॉइंट्स) पर बूथ बनाए गए ताकि कोई भी बच्चा न छूटे। जागरूकता और सेलिब्रिटी सपोर्ट: सरकार ने इस हिचकिचाहट को दूर करने के लिए धार्मिक गुरुओं, स्थानीय नेताओं और मशहूर हस्तियों (जैसे अमिताभ बच्चन) की मदद ली, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ा।

भारत का अंतिम पोलियो मामला

  1. अंतिम जंगली पोलियो मामला: 13 जनवरी 2011
  2. स्थान: हावड़ा, पश्चिम बंगाल
  3. पोलियो-मुक्त घोषणा, 27 मार्च 2014
  4. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को आधिकारिक रूप से पोलियो-मुक्त घोषित किया।

पोलियो उन्मूलन में WHO की भूमिका, विश्व स्वास्थ्य संगठन निम्न कार्य करता है, निगरानी (Surveillance)

  1. पोलियो मामलों की पहचान
  2. प्रयोगशाला परीक्षण

वैश्विक समन्वय विश्व से पोलियो का पूर्ण उन्मूलन, साझेदार संस्थाएं

  • UNICEF
  • Rotary International
  • CDC (USA)
  • Bill & Melinda Gates Foundation

पोलियो उन्मूलन की उपलब्धियां

वर्ष उपलब्धि
1988 125 देशों में पोलियो स्थानिक था
1994 अमेरिका पोलियो-मुक्त
2000 पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र पोलियो-मुक्त
2014 भारत पोलियो-मुक्त
2020 अफ्रीका पोलियो-मुक्त घोषित
वर्तमान केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान में जंगली पोलियो

महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न 1: वर्तमान में पोलियो-स्थानिक देश कौन-कौन से हैं?
उत्तर: अफगानिस्तान और पाकिस्तान।

प्रश्न 2: भारत को कब पोलियो-मुक्त घोषित किया गया?
उत्तर: 27 मार्च 2014,

प्रश्न 3: भारत में अंतिम पोलियो मामला कब मिला था?
उत्तर: 13 जनवरी 2011,

प्रश्न 4: पल्स पोलियो अभियान कब शुरू हुआ?
उत्तर: 1995,

प्रश्न 5: GPEI की स्थापना कब हुई?
उत्तर: 1988,

निष्कर्ष

विश्व ने पोलियो उन्मूलन में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है। 1988 में जहाँ 125 से अधिक देशों में पोलियो मौजूद था, वहीं आज जंगली पोलियो वायरस केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान तक सीमित रह गया है। भारत 2014 से पोलियो-मुक्त देश है और विश्व स्तर पर पोलियो उन्मूलन के लिए एक सफल मॉडल माना जाता है। हालांकि, जब तक दुनिया का अंतिम पोलियो मामला समाप्त नहीं हो जाता, तब तक वैश्विक टीकाकरण और निगरानी अभियान जारी रहेंगे। पोलियो-प्रभावित देशों की यात्रा से पहले समय पर पोलियो बूस्टर डोज लेना और उसका प्रमाणपत्र (Yellow Fever card)  साथ रखना अंतरराष्ट्रीय यात्रा का एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य नियम है। 

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