ईरान ने ट्रम्प के इरादों को कुचला, अमेरिका की तानाशाही में पूरी दुनियाँ एक युद्ध के जाल में फसा हुआ है ? वैश्विक शक्ति संतुलन के बदलाव की शुरूवात हो चुकी है इस युद्ध मे भारत को होगा फाइदा..

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक संयुक्त सैन्य हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु के साथ युद्ध की सुरुवात हो गई है ।व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए किसी देश पर हमला करना उस देश की एकता अखंडता और संप्रभुता पर हमला है। परंतु किसी को मारना और हमला करना अमेरिका जैसे देश पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता अमेरिका का अपना स्वार्थ पूरा होना चाहिए। इस वर्ष वेनेजुएला के बाद ईरान दूसरा देश है जिस पर अमेरिका ने हमला किया है। यह सभी कमजोर देशों के लिए एक सबक है कि बिना ताकत और बिना हथियार के दुनिया में आप केवल दूसरों के सहारे ही जीवित रह सकते हैं। अमेरिका पूरी दुनिया की समस्या बनता जा रहा है। रूस और चीन को छोड़कर कई देश या तो अमेरिका के प्रभाव या दबाव में हैं या उसके दबाव में काम कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, अफ्रीका के कई देश और भारत जैसे तमाम देश इस संघर्ष में ऐसे बैठे हुए हैं जैसे महाभारत में चीरहरण के समय पाँचों पांडव मूक-बधिर होकर बैठे थे। पाकिस्तान जो स्वयं को अक्सर मुस्लिम देशों का नेता बताने की कोशिश करता है आज चुप क्यों है? मुस्लिम देशों में पाकिस्तान ही वह देश है जिसके पास परमाणु शक्ति है। 2026 में वेनेजुएला के बाद ईरान दूसरा देश है जिसके सर्वोच्च नेता को मारा गया है। आशंका है कि अभी और देशों पर भी अमेरिका की नजर हो सकती है।

दुनियाभर में शिया मुस्लिम समुदाय इस्लाम की दूसरी सबसे बड़ी शाखा है जो कुल मुस्लिम आबादी का लगभग 12% से 15% हिस्सा है। कुल वैश्विक संख्या लगभग 20 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। ईरान में दुनिया का सबसे बड़ा शिया बहुल देश, जहाँ लगभग 90-95% आबादी शिया की है। भारत में शिया मुस्लिम समुदाय इस्लाम की एक महत्वपूर्ण शाखा है। भारत को दुनिया में ईरान के बाद दूसरी सबसे बड़ी शिया आबादी वाला देश भारत है भारत में शिया मुस्लिमों की संख्या लगभग 3 से 5 करोड़ है।भारत एक ऐसा देश है जहाँ विभिन्न धर्मों (Religions) के लोग अपेक्षाकृत शांति (Peace) और सह-अस्तित्व (Coexistence) के साथ रहते हैं, हालांकि कभी-कभी कट्टरता (Extremism) के कारण सामाजिक तनाव (Social Tension) भी उत्पन्न हो जाता है। ऐसे में सभी नागरिकों का यह कर्तव्य (Duty) है कि वे अपने देश (Nation) के प्रति सम्मान (Respect) बनाए रखें और सामाजिक सौहार्द (Social Harmony) को मजबूत करें। यह समय हिंदू-मुस्लिम करने का नहीं है और न ही किसी मुस्लिम नेता की मृत्यु पर खुश होने का समय है, बल्कि आत्ममंथन का समय है। खाड़ी देशों में मुस्लिम संगठन होने के बावजूद भी ईरान आज अकेला दिखाई दे रहा है। गाजा, लेबनान, सीरिया और जॉर्डन के बाद अब ईरान का नंबर आया है। अफगानिस्तान और इराक पहले ही अमेरिका की कार्रवाई झेल चुके हैं।

ईरान अपने पड़ोसी देशों पर क्यों हमला कर रहा है ?

ईरान और इसराइल अमेरिका से तनाव और युद्ध की मौजूदा स्थिति में ईरान ने अपने पड़ोसी देशों बहरीन, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और इराक पर हमला करने के मुख्य कारणों में इन देशों में अमेरिकी ठिकानों की मौजूदगी का होना है ईरान के अधिकांश पड़ोसियों के यहाँ अमेरिकी सैन्य अड्डे (Military Bases) हैं। ईरान इन देशों को अमेरिका का “सहयोगी” मानता है और अपनी जमीन से अमेरिकी हमलों को रोकने के लिए उन पर दबाव बनाना चाहता है। सऊदी अरब अमेरिका को  सीधे तौर पर सपोर्ट करता है ईरान पर हमला करने के लिए।

UNO बना दर्शक, UN महासचिव की बेबसी

सुरक्षा परिषद की विफलता (Deadlock in UNSC) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस युद्ध को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है। अमेरिका ने अपने ‘वीटो’ पावर का इस्तेमाल कर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव किया है, जबकि रूस और चीन ने अमेरिका की इस कार्रवाई को “अवैध आक्रमण” और “तानाशाही” करार दिया है। इस टकराव की वजह से कोई भी शांति प्रस्ताव पारित नहीं हो पा रहा है। आज की स्थिति वैसी ही दिख रही है जैसी दूसरे विश्व युद्ध से पहले ‘लीग ऑफ नेशंस’ की थी जहाँ अंतरराष्ट्रीय संस्था के पास नियम तो हैं, लेकिन बड़ी ताकतों को रोकने की शक्ति नहीं। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र (UNO) की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि यह संगठन केवल अमेरिका के लिए काम करता है और उसके इशारों पर चलता है। जिस तरह से अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, यदि ईरान ने किसी अन्य देश पर ऐसा हमला किया होता तो अब तक संयुक्त राष्ट्र कड़ी प्रतिक्रिया दे चुका होता और पूरी दुनिया शोक व्यक्त कर रही होती।

महासचिव की बेबसी (Helplessness of the Secretary-General)
UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बार-बार “तत्काल युद्धविराम” (Immediate Ceasefire) की अपील की है लेकिन अमेरिका और इजरायल ने इसे यह कहते हुए ठुकरा दिया है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आतंकवाद को पूरी तरह खत्म होने तक नहीं रुकेंगे। UN अब केवल मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) की अपील करने तक सीमित रह गया है। यह युद्ध पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन ईरान पर अमेरिकी हमला और ईरान द्वारा पड़ोसियों पर पलटवार, दोनों ने UN चार्टर की धज्जियां उड़ा दी हैं। आलोचकों का मानना है कि ताकतवर देश (जैसे अमेरिका) अपनी मर्जी से युद्ध थोप रहे हैं और UN केवल एक मूकदर्शक (Silent Spectator) बनकर रह गया है, जो राष्ट्रों के बीच संतुलन बनाने में विफल है।

खाड़ी देशों में संतुलन बनाए रखने के लिए अमेरिका इज़रायल सोच…

मध्य-पूर्व में संतुलन बनाए रखने के लिए अमेरिका इज़रायल को प्रत्यक्ष समर्थन देता है। जिसे ‘क्षेत्रीय रक्षा वास्तुकला’ (Regional Defense Architecture) कहा जाता है। अमेरिका और इज़रायल का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा अरब-इज़रायल गठबंधन बनाना है जो ईरान के ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ (हिजबुल्लाह, हूती आदि) को संतुलित कर सके। सैन्य एकीकरण (CENTCOM) के कारण इज़रायल अब अमेरिकी मध्य कमान (CENTCOM) का हिस्सा है, जिससे वह खाड़ी देशों के साथ मिलकर खुफिया जानकारी और हवाई रक्षा (Air Defense) साझा कर पाता है। अमेरिका की नीति यह सुनिश्चित करना है कि इज़रायल के पास क्षेत्र में हमेशा ‘गुणात्मक सैन्य बढ़त’ रहे, ताकि कोई भी पड़ोसी देश या समूह उस पर हमला करने का साहस न करे। यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होते तो शायद स्थिति अलग होती और दुनिया हमला करने से पहले कई बार सोचती। ऐसा नहीं है कि ईरान ने प्रयास नहीं किया, परंतु प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण उसका परमाणु कार्यक्रम सफल नहीं हो सका। दुनिया में जिस देश को स्वयं को सुरक्षित रखना है उसके लिए आत्मनिर्भर होना अत्यंत आवश्यक है।

“एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस” (Axis of Resistance) का कमजोर होना

ईरान ने दशकों से मध्य-पूर्व में अपने प्रभाव के लिए एक नेटवर्क तैयार किया था, जिसमें हिजबुल्लाह (लेबनान), हमास (गाजा) और हूती (यमन) शामिल थे। 2024-25 में सीरिया में बशर अल-असद शासन के पतन के बाद ईरान का एक बड़ा सहयोगी समाप्त हो गया। इज़रायली हमलों में हिजबुल्लाह और हमास के कई बड़े नेताओं के मारे जाने से ईरान की क्षेत्रीय स्थिति कमजोर हुई है।

फरवरी 2026 के अंत में जब अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और नेतृत्व पर बड़े हमले किए, तो ईरान ने इसके जवाब में “आक्रामक आत्मरक्षा” (Aggressive Self-Defense) की नीति अपनाई। ईरान का मानना है कि जो पड़ोसी देश (जैसे UAE, बहरीन, कतर) अपनी धरती पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों को जगह देते हैं, वे परोक्ष रूप से अमेरिका का समर्थन करते हैं।

OIC क्या कर रहा है ?

OIC (Organization of Islamic Cooperation) आमतौर पर किसी सदस्य देश के युद्ध में सीधे सैन्य हस्तक्षेप नहीं करता। यह एक राजनीतिक और राजनयिक संगठन है, न कि सैन्य गठबंधन। इसके सदस्य देशों के अपने-अपने राष्ट्रीय हित होते हैं, इसलिए इसकी प्रतिक्रिया अक्सर सर्वसम्मति पर निर्भर करती है। OIC के पास संयुक्त सेना या अनिवार्य कार्रवाई की शक्ति नहीं है। खाड़ी देशों (GCC) का रुख “अपनी सुरक्षा सर्वोपरि” पर आधारित है। वे ईरान की मिसाइल गतिविधियों और क्षेत्रीय हस्तक्षेप की आलोचना करते हैं, पर साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता भी चाहते हैं। मुस्लिम जगत में इस मुद्दे पर मतभेद हैं। कुछ लोग ईरान के “प्रतिरोध की धुरी” का समर्थन करते हैं, जबकि कुछ संगठन इसे आधुनिक उपनिवेशवाद की संज्ञा देते हैं। आम राय यह है कि ईरान का भविष्य वहाँ के लोगों को तय करना चाहिए, न कि बाहरी हस्तक्षेप से।

अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई, सेना प्रमुख अब्दुल रहीम मौसवी, रक्षा मंत्री मेजर जनरल अज़ीज़ नासिरज़ादेह, तथा रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख जनरल मोहम्मद पाकपोर और अन्य वरिष्ठ कमांडरों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं। पूरी दुनिया में वर्तमान हालात तनावपूर्ण हैं और स्थिति युद्ध जैसी प्रतीत होती है। फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी।

भारत को कितना फाइदा या नुकसान होगा?

इस युद्ध से भारत में मिला-जुला प्रभाव है जिसमें आर्थिक चुनौतियां अधिक गंभीर हैं। भारत के लिए इस युद्ध के संभावित नुकसान और कुछ रणनीतिक पहलुओं को समझना होगा। इस युद्ध का असर दुनिया में दिखना सुरू हो गया है गैस और तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है।

  1. भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 88% आयात करता है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें $80-$90 प्रति बैरल तक पहुँचने की संभावना है।
  2. अनुमान के अनुसार, तेल की कीमतों में हर $1 की वृद्धि भारत के आयात बिल में लगभग ₹12,000 करोड़ जोड़ती है।
  3. प्रवासी भारतीयों और प्रेषण (Remittances) पर संकट है खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब, कतर आदि) में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते हैं।
  4. युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा खतरे में है और भारत को मिलने वाले कुल प्रेषण का लगभग एक-तिहाई हिस्सा (UAE से 18%, सऊदी से 7%) प्रभावित हो सकता है।
  5. व्यापार और लॉजिस्टिक्स में बाधा की स्थिति है होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बाधित होने से भारत का 50% कच्चा तेल, 85% LPG और 55% LNG का आयात प्रभावित हो सकता है। शिपिंग और बीमा लागत बढ़ने से भारतीय निर्यातकों के मार्जिन पर दबाव पड़ेगा।
  6. ईरान द्वारा UAE पर हमले से भारत को दूरगामी फाइदे होंगे क्यों भारत के 60% माध्यम Businessman दुबई में इन्वेस्ट कर ब्यापर कर रहे है और वही अपना नया रहने का ठिकाना बना लिया है क्यों की दुबई में 5 करोड़ इन्वेस्ट करने से वहाँ की सरकार गोल्डन रेजिडेंस कार्ड देती है जिससे आराम से दुबई मे रह सकते है दुबई में बिजनेस टैक्स फ्री है इस युद्ध से UAE में रह रहे लोग फिर से भारत की तरफ रुख कर ब्यापार करना चाहेंगे जो भारत के लिए अच्छा  होगा।
  7. संभावित ‘फायदे’मे युद्ध में सीधा “फायदा” कम है, लेकिन भारत कुछ रणनीतिक लाभ उठा सकता है जिसमे रक्षा और तकनीक सहयोग बढ़ सकता है। हाल ही में (फरवरी 2026) भारत और इजरायल ने ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ को अपग्रेड किया है, जिससे AI और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में भारत को लाभ मिल सकता है। कुछ खाड़ी देशों के साथ भारत का सैन्य व्यापर बड़ने के आसार है।
  8. सस्ते तेल के वैकल्पिक स्रोत यदि प्रतिबंधों के कारण रूस या वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति सुगम होती है तो भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को विविध (Diversify) कर सकता है।
  9. भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) और सभी पक्षों (ईरान, इजरायल, अमेरिका) के साथ अच्छे संबंधों के कारण एक शांति दूत के रूप में उभर सकता है। परंतु इस बार पाकिस्तान बाजी मारना चाहता है पर दुनिया को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है क्यों की भारत ही वह देश है जो मध्यस्थता कर इस युद्ध को समझौते के टेबल पर ला सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

ईरान और अमेरिका के बीच वर्तमान तनाव कोई नया विषय नहीं है, बल्कि यह दशकों पुरानी वैचारिक (Ideological), राजनीतिक (Political) और सामरिक (Strategic) प्रतिस्पर्धा का परिणाम है। 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति (Iranian Islamic Revolution) के बाद से दोनों देशों के संबंध लगातार खराब होते रहे हैं। अमेरिका, जहाँ खुद को वैश्विक स्थिरता (Global Stability) और लोकतंत्र (Democracy) का रक्षक कहता है, वहीं ईरान इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप (Interference) और क्षेत्रीय वर्चस्व (Regional Dominance) की कोशिश के रूप में देखता है। विवाद का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों (Allied Countries) का मानना है कि ईरान परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) विकसित कर रहा है, जबकि ईरान इसे शांतिपूर्ण ऊर्जा कार्यक्रम (Peaceful Energy Program) बताता है। सच तो यह है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत में कहीं न कहीं अमेरिका की ही भूमिका रही है, और अब ईरान के लिए परमाणु सम्पन्न (Nuclear-armed) देश बनना एक मजबूरी या जरूरी दोनों स्थित में जरूरत है, क्योंकि आज के समय में परमाणु शक्ति को एक “ब्रह्मास्त्र” (Ultimate Deterrent) के रूप में देखा जाता है, जिससे पूरी दुनिया भयभीत रहती है। नॉर्थ कोरिया (North Korea) इसका एक उदाहरण है, जिससे अमेरिका चाहकर भी सीधे टकराव से बचता है।

अमेरिका द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों पर प्रतिबंध (Sanctions) लगाना कई लोगों के अनुसार एकतरफा शक्ति (Unilateral Power) और प्रभुत्व (Dominance) का उदाहरण माना जाता है। कुछ आलोचकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संगठन (International Organizations) अमेरिका के प्रभाव में काम करते हैं। वहीं रूस (Russia) को एक ऐसी शक्ति के रूप में देखा जाता है जो संतुलन (Balance of Power) बनाए रखने की कोशिश करता है, जबकि चीन (China) एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था (Emerging Economy) के रूप में अक्सर अवसरवाद (Opportunism) की नीति अपनाता दिखाई देता है। भारत (India) ने सामान्यतः युद्ध (War) की आलोचना की है और शांति, संवाद (Dialogue), कूटनीति (Diplomacy) तथा पारस्परिक विश्वास (Mutual Trust) पर जोर दिया है। जहाँ तक व्यापक सामाजिक और वैचारिक दृष्टिकोण (Social and Ideological Perspective) का प्रश्न है, यह कहना उचित होगा कि किसी भी प्रकार का धार्मिक या वैचारिक वर्चस्व (Religious or Ideological Dominance) संघर्ष को जन्म देता है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य (Global Scenario) यह संकेत देती है कि शक्ति के बिना किसी भी देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष स्थिति (Global Standing) बनाना कठिन है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics) के संदर्भ में यह स्पष्ट है कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष केवल दो देशों का मामला नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया (Global Impact) पर पड़ता है। कई विश्लेषकों (Analysts) का मानना है कि अमेरिका कई बार अपने राष्ट्रीय हितों (National Interests) के लिए वैश्विक स्तर पर हस्तक्षेप करता रहा है।

“कर्म ही पूजा है” (Work is Worship) — यह सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक (Relevant) है। अच्छे कर्म (Good Deeds) व्यक्ति को सम्मान (Respect) दिलाते हैं, जबकि बुरे कर्म (Bad Deeds) पतन (Downfall) की ओर ले जाते हैं। स्वर्ग (Heaven) और नर्क (Hell) की अवधारणा भी मनुष्य के कर्मों (Actions) पर आधारित मानी जाती है। आज के समय में यह भी आवश्यक है कि वैश्विक शक्तियों (Global Powers) के बीच संतुलन (Balance of Power) बना रहे, ताकि कोई एक देश पूरी दुनिया पर अत्यधिक प्रभुत्व (Excessive Dominance) न स्थापित कर सके। दीर्घकालिक समाधान (Long-term Solution) केवल संवाद (Dialogue), कूटनीति (Diplomacy) और पारस्परिक विश्वास (Mutual Trust) के माध्यम से ही संभव है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सहयोग, संतुलन और शांति की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। शक्ति की पूजा हमेशा से हुई है शक्ति होगी तो दुनिया आपके आगे झुकेगी। ईश्वर ने जिस भी व्यक्ति को इस धरती पर भेजा है, उसके जीवन, भोजन और सुरक्षा के लिए प्रकृति में व्यवस्था की है। धरती पर जन्म लेने वाला हर व्यक्ति पहले इंसान होता है, बाद में किसी धर्म या मजहब से जुड़ता है। इसलिए अनैतिक और अधार्मिक कार्यों को छोड़कर ईश्वर, अल्लाह, यीशु, बुद्ध, नानक आदि की शिक्षाओं की शरण में जाना चाहिए और अच्छे कर्म करने चाहिए, दुनिया मे अगर अमन चाहिए तो युद्ध छोड़ कर बुद्ध के रास्ते को अपनाना होगा यही संसार का अमरत्व सत्य है।

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

 

278 thoughts on “ईरान ने ट्रम्प के इरादों को कुचला, अमेरिका की तानाशाही में पूरी दुनियाँ एक युद्ध के जाल में फसा हुआ है ? वैश्विक शक्ति संतुलन के बदलाव की शुरूवात हो चुकी है इस युद्ध मे भारत को होगा फाइदा..

  1. पिंगबॅक doryx 50mg
  2. I don’t know if it’s just me or if everybody else experiencing issues with your site. It appears as though some of the written text on your content are running off the screen. Can someone else please provide feedback and let me know if this is happening to them as well? This could be a problem with my web browser because I’ve had this happen before. Appreciate it

  3. Good post. I study something more difficult on different blogs everyday. It’s going to always be stimulating to learn content material from other writers and observe a little bit one thing from their store. I’d prefer to use some with the content material on my blog whether you don’t mind. Natually I’ll give you a link in your web blog. Thanks for sharing.

  4. पिंगबॅक lasix water pill
  5. पिंगबॅक oraycea
  6. पिंगबॅक rifampicine
  7. You are so interesting! I don’t believe I have read anything like that before. So nice to find another person with some genuine thoughts on this subject. Really.. thank you for starting this up. This site is something that’s needed on the web, someone with some originality.

  8. You are so cool! I do not suppose I have read through a single thing like this before. So nice to discover somebody with a few unique thoughts on this issue. Really.. many thanks for starting this up. This web site is something that is required on the internet, someone with a little originality.

  9. An outstanding share! I’ve just forwarded this onto a co-worker who has been conducting a little research on this. And he in fact bought me breakfast due to the fact that I discovered it for him… lol. So let me reword this…. Thanks for the meal!! But yeah, thanks for spending time to discuss this topic here on your internet site.

  10. Easily, the post is really the greatest on this laudable topic. I concur with your conclusions and will thirstily look forward to your future updates. Saying thank will not just be sufficient, for the wonderful c lucidity in your writing. I will instantly grab your rss feed to stay privy of any updates. Solid work and much success in your business enterprise!

  11. An impressive share! I’ve just forwarded this onto a colleague who has been doing a little homework on this. And he in fact bought me breakfast simply because I discovered it for him… lol. So let me reword this…. Thank YOU for the meal!! But yeah, thanks for spending time to discuss this subject here on your web site.

  12. Nevertheless, it’s all carried out with tongues rooted solidly in cheeks, and everybody has got nothing but absolutely love for their friendly neighborhood scapegoat. In reality, he is not merely a pushover. He is simply that extraordinary breed of person solid enough to take all that good natured ribbing for what it really is.

  13. This is the right website for anybody who really wants to find out about this topic. You understand a whole lot its almost hard to argue with you (not that I personally will need to…HaHa). You certainly put a brand new spin on a topic that has been discussed for ages. Wonderful stuff, just excellent.

  14. Right here is the perfect webpage for anybody who would like to understand this topic. You understand so much its almost hard to argue with you (not that I personally would want to…HaHa). You certainly put a brand new spin on a topic that’s been discussed for years. Excellent stuff, just wonderful.

  15. After exploring a few of the blog articles on your blog, I really appreciate your way of writing a blog. I book-marked it to my bookmark webpage list and will be checking back in the near future. Take a look at my web site too and tell me how you feel.

  16. You’re so awesome! I don’t think I’ve read something like that before. So nice to find another person with a few unique thoughts on this subject. Really.. many thanks for starting this up. This website is something that is required on the web, someone with some originality.

  17. Hello there, I believe your site may be having browser compatibility issues. Whenever I take a look at your website in Safari, it looks fine however when opening in IE, it’s got some overlapping issues. I merely wanted to provide you with a quick heads up! Aside from that, wonderful site.

  18. Next time I read a blog, I hope that it does not disappoint me just as much as this particular one. I mean, Yes, it was my choice to read through, however I actually thought you would probably have something useful to say. All I hear is a bunch of whining about something that you could fix if you were not too busy seeking attention.

  19. This is the perfect site for anyone who hopes to find out about this topic. You realize a whole lot its almost tough to argue with you (not that I actually will need to…HaHa). You certainly put a new spin on a subject that’s been written about for many years. Excellent stuff, just wonderful.

  20. Can I simply say what a comfort to discover someone who really understands what they’re discussing on the net. You certainly know how to bring a problem to light and make it important. A lot more people really need to check this out and understand this side of your story. I was surprised you’re not more popular because you surely have the gift.

  21. Can I just say what a relief to seek out someone who actually knows what theyre speaking about on the internet. You positively know find out how to bring a problem to mild and make it important. Extra individuals have to read this and perceive this side of the story. I cant believe youre not more in style because you positively have the gift.

  22. Oh my goodness! Amazing article dude! Thank you, However I am experiencing issues with your RSS. I don’t know the reason why I am unable to join it. Is there anyone else having identical RSS problems? Anyone that knows the answer will you kindly respond? Thanx.

  23. An outstanding share! I have just forwarded this onto a coworker who had been doing a little research on this. And he in fact bought me dinner simply because I discovered it for him… lol. So allow me to reword this…. Thank YOU for the meal!! But yeah, thanks for spending some time to talk about this subject here on your blog.

प्रतिक्रिया व्यक्त करा

आपला ई-मेल अड्रेस प्रकाशित केला जाणार नाही. आवश्यक फील्डस् * मार्क केले आहेत