भारत के एक अद्भुत ब्राह्मण गाँव (दीक्षित गरेठी) की कहानी,ब्रह्मांड की रचना के उपरांत पहली बार एक ऐसा मंदिर बन रहा है,

भारत के एक अद्भुत ब्राह्मण गाँव (दीक्षित गरेठी) की कहानी

ब्रह्मांड की रचना के उपरांत पहली बार एक ऐसा मंदिर बन रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। यह कहानी भारत के एक ऐसे गाँव की है, जिसे लोग देश का पहला “हिंदू गाँव” और “अघोषित हिंदू राष्ट्र गाँव” तक मानते हैं।

“दीक्षित गरेठी” एक ऐसा गाँव है, जहाँ लगभग 100% ब्राह्मण परिवार निवास करते हैं। यह गाँव अपनी अनोखी परंपराओं और जीवनशैली के कारण लोगों की रुचि का केंद्र बना हुआ है। यहाँ के सभी लोग शुद्ध शाकाहारी हैं तथा गाँव में कोई भी व्यक्ति मांस-मदिरा का सेवन नहीं करता। गाँव के लगभग सभी लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं।

हालाँकि गाँव अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन सरकारी सुविधाओं की कमी के कारण यहाँ की स्थिति काफी पिछड़ी हुई है। शिक्षा का स्तर बहुत निम्न है, क्योंकि गाँव के आसपास कोई विद्यालय नहीं है। बच्चों को पढ़ने के लिए लगभग 5–6 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

 

विस्तार से जानते हैं दीक्षित गरेठी (DIXIT GARETHI) के बारे में

“दीक्षित गरेठी” भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिले के महसी ब्लॉक में स्थित गरेठी गुरुदत्त सिंह ग्राम सभा का एक प्रमुख गाँव है। यह गाँव लगभग 100 ब्राह्मण परिवारों का गाँव है और अपनी विशेष सामाजिक व्यवस्था के कारण अत्यंत अद्भुत माना जाता है।

यहाँ 100% ब्राह्मण परिवार निवास करते हैं और सभी लोग पूर्णतः शुद्ध शाकाहारी हैं। गाँव में किसी भी प्रकार के मांस अथवा मदिरा का सेवन नहीं किया जाता। सभी परिवार खेती-बाड़ी से जुड़े हुए हैं।

गाँव में किसी प्रकार की पर्याप्त सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं है। शिक्षा का स्तर काफी निम्न है, क्योंकि आसपास कोई विद्यालय नहीं है। लगभग 5–6 किलोमीटर दूर राजी चौराहा पर स्कूल स्थित हैं, लेकिन वहाँ की शिक्षा व्यवस्था और गुणवत्ता भी अत्यंत कमजोर मानी जाती है।

यह क्षेत्र घाघरा नदी के प्रभाव क्षेत्र में आता है। हर वर्ष आने वाली भीषण बाढ़ के कारण किसानों की फसलें नष्ट हो जाती हैं, जिससे गाँव की आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रहती है। यहाँ मुख्य रूप से गन्ना, गेहूँ और धान की खेती होती है। इसके अतिरिक्त कुछ सब्जियाँ भी उगाई जाती हैं। लगभग 10% क्षेत्र में पेड़, बागवानी तथा आम के बाग स्थित हैं।

 

गरेठी गुरुदत्त सिंह ग्राम सभा की विशेषता

गरेठी अपने आप में इसलिए भी अद्भुत है क्योंकि सात “गरेठी” गाँवों को मिलाकर “गरेठी गुरुदत्त सिंह” ग्राम सभा बनाई गई है। “गरेठी गुरुदत्त सिंह” नाम से पोस्ट ऑफिस तथा पिन कोड 271851 भी मौजूद है।

दीक्षित गरेठी में कई वर्षों से ग्राम प्रधानी की व्यवस्था है, लेकिन यदि गाँव की वास्तविक स्थिति देखी जाए तो ऐसा प्रतीत होता है मानो यह गाँव अभी भी आधुनिक विकास से बहुत दूर है। गाँव आज भी कच्चे रास्तों के माध्यम से राजी चौराहा से जुड़ा हुआ है।

राजी चौराहा गाँव से लगभग 4 किलोमीटर दूर एक छोटा-सा बाजार क्षेत्र है, जहाँ लोगों की दैनिक आवश्यकताओं का सामान उपलब्ध हो जाता है।

ब्रह्मदेव मंदिर और गुरुकुल का निर्माण

गाँव में बन रहा “ब्रह्मदेव मंदिर” ब्रह्मचारी देव को समर्पित मंदिर है। मंदिर के निकट लगभग 100 वर्ष पुराना पीपल का विशाल वृक्ष स्थित है। सभी की मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से भक्तों की माँगी गई सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

गरेठी गाँव की एक विशेष बात यह भी है कि यहाँ सभी घर ब्राह्मणों के हैं और अधिकांश परिवार उच्च कुल के दीक्षित पंडितों के हैं। इसके बावजूद, ब्रह्मांड की रचना के उपरांत पहली बार गाँव में एक सार्वजनिक मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।

अब तक गाँव के अधिकांश लोग अपने-अपने घरों के सामने छोटे-छोटे शिवाले बनाकर वहीं पूजा-अर्चना करते रहे हैं। परंपरा ऐसी रही है कि कोई भी व्यक्ति दूसरे के शिवाले में जल नहीं चढ़ाता था।

गाँव के सभी नवयुवकों के प्रयास से 8 मई 2026 को गाँव में “ब्रह्मदेव मंदिर” तथा बच्चों को धर्म और संस्कारों का ज्ञान देने हेतु “गुरुकुल” निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया है।

इस मंदिर निर्माण के मुख्य प्रेरणास्रोत और निर्माता सुनील कुमार दीक्षित हैं, जो स्वर्गीय पंडित जीवन लाल दीक्षित के पुत्र हैं तथा वर्तमान में सशस्त्र सीमा बल (SSB) में कार्यरत हैं।

सुनील कुमार दीक्षित का मानना है कि मंदिर निर्माण से गाँव के लोगों को एक नई और सकारात्मक दिशा मिलेगी। उनके अनुसार, इससे गाँव का भविष्य सुधर सकता है तथा गुरुकुल जैसी व्यवस्था बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और धार्मिक ज्ञान के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।

इस पुनीत कार्य में गाँव के सभी लोगों का बढ़-चढ़कर सहयोग मिल रहा है। प्रमुख सहयोगियों में सशिकांत दीक्षित, मनीष दीक्षित, राजू दीक्षित, सुभाष दीक्षित और दिनेश दीक्षित आदि शामिल हैं, जो मंदिर निर्माण कार्य में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

 

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