BRIC summit भारत में हो रहा है BRIC सम्मेलन में आ सकती है नई मुद्रा, अमेरिका की नजर BRIC summit पर

BRIC क्या है ? इतिहास, विस्तार, महत्व और आज की चुनौतियाँ

BRIC दुनिया की चार प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओंBrazil (ब्राजील), Russia (रूस), India (भारत) और China (चीन)के नामों से बना एक संक्षिप्त नाम है। बाद में South Africa (दक्षिण अफ्रीका) के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। आज BRICS केवल आर्थिक समूह नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, व्यापार, वित्त और विकासशील देशों की आवाज़ का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। पहला BRIC शिखर सम्मेलन 16 जून 2009 को रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ। इस बैठक में चारों देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए।

The 18th BRICS Summit is being hosted by India in New Delhi at Bharat Mandapam on September 12–13, 2026.
The 18th BRICS Summit is being hosted by India in New Delhi at Bharat Mandapam on September 12–13, 2026.

भारत में BRICS Summit 2026

भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी दौरान 18वाँ BRICS Summit भारत में आयोजित किया जाना है। सम्मेलन का मुख्य आयोजन 12 और 13 September 2026. Bharat Mandapam, Pragati Maidan, New Delhiनई दिल्ली में प्रस्तावित है। इसमें BRICS के 10 पूर्ण सदस्य देशों के साथ Partner Countries और अन्य आमंत्रित प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, स्थानीय मुद्राओं में भुगतान, डिजिटल तकनीक, AI, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और Global South की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत की मेजबानी वाला BRICS Summit 2026 भारत के लिए अपनी कूटनीतिक शक्ति और Global South में नेतृत्व को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

 BRIC शब्द की शुरुआत कैसे हुई?

BRIC शब्द किसी सरकार ने नहीं बनाया था। इसे पहली बार 2001 में Goldman Sachs के अर्थशास्त्री Jim O’Neill ने अपने शोधपत्र “Building Better Global Economic BRICs” में इस्तेमाल किया था। मिरुआत में यह औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन नहीं, बल्कि आर्थिक विश्लेषण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द था।

उनका तर्क था कि ब्राजील, रूस, भारत और चीन तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएँ हैं और आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में इनका महत्व बहुत बढ़ सकता है।

BRIC

  • B – Brazil
  • R – Russia
  • I – India
  • C – China
  1. BRIC का पहला राजनीतिक कदम

BRIC देशों के विदेश मंत्रियों की पहली औपचारिक बैठक 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में हुई। इसके बाद चारों देशों ने महसूस किया कि वे केवल आर्थिक मामलों में ही नहीं, बल्कि वैश्विक शासन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर भी मिलकर काम कर सकते हैं।

BRICS देशों की सूचीकौनसा देश कब शामिल हुआ?

क्रम देश BRICS में शामिल होने का वर्ष समूह
1 🇧🇷 ब्राजील (Brazil) 2006 संस्थापक सदस्य
2 🇷🇺 रूस (Russia) 2006 संस्थापक सदस्य
3 🇮🇳 भारत (India) 2006 संस्थापक सदस्य
4 🇨🇳 चीन (China) 2006 संस्थापक सदस्य
5 🇿🇦 दक्षिण अफ्रीका (South Africa) 2011 पहला विस्तार
6 🇪🇬 मिस्र (Egypt) 2024 विस्तार
7 🇪🇹 इथियोपिया (Ethiopia) 2024 विस्तार
8 🇮🇷 ईरान (Iran) 2024 विस्तार
9 🇦🇪 संयुक्त अरब अमीरात (UAE) 2024 विस्तार
10 🇮🇩 इंडोनेशिया (Indonesia) 2025 विस्तार

Argentina और Saudi Arabia, Argentina को 2024 विस्तार के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन नई सरकार ने सदस्यता लेने से इनकार कर दिया।

BRICS देशों की वर्तमान चुनौतियाँ और भविष्य की तैयारी

BRICS का विस्तार होने के बाद इसका प्रभाव पहले की तुलना में काफी बढ़ा है। लेकिन बड़े आकार और अलगअलग राष्ट्रीय हितों के कारण BRICS के सामने कई गंभीर चुनौतियाँ भी हैं। इसका भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि सदस्य देश इन मतभेदों के बावजूद कितनी व्यावहारिक एकता बना पाते हैं।

 वर्तमान की प्रमुख चुनौतियाँ

 🇮🇳🇨🇳 भारतचीन मतभेद भारत और चीन BRICS के दो सबसे महत्वपूर्ण सदस्य हैं, लेकिन दोनों के बीच सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है। यह BRICS में साझा निर्णय लेने को प्रभावित कर सकता है।

 रूस और पश्चिमी देशों का तनाव Russia–Ukraine युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों ने BRICS की geopolitics को जटिल बनाया है। सभी सदस्य रूस के दृष्टिकोण से सहमत नहीं हैं।

डॉलर पर निर्भरता

कुछ BRICS देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर की निर्भरता कम करना चाहते हैं। लेकिन डॉलर की जगह कोई दूसरी मुद्रा स्थापित करना आसान नहीं है। BRICS की अपनी एक साझा मुद्रा बनाने की चर्चा होती रही है, लेकिन सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाएँ, ब्याज दरें, मुद्रास्फीति और monetary policies बहुत अलग हैं। इसलिए निकट भविष्य में common currency बड़ी चुनौती है।

सदस्यों की संख्या बढ़ने से समन्वय BRICS के विस्तार से समूह की आर्थिक शक्ति बढ़ी है, लेकिन अधिक देशों के कारण सर्वसम्मति बनाना कठिन हो सकता है।

BRICS को लेकर अमेरिका की सोच

अमेरिका BRICS को सीधे तौर पर अपना दुश्मन या G7 का विकल्प नहीं मानता, लेकिन इसके बढ़ते विस्तार और China तथा Russia की भूमिका को गंभीरता से देखता है। BRICS के कुछ सदस्य डॉलर पर निर्भरता कम करने, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था विकसित करने की बात करते हैं। इससे लंबे समय में अमेरिकी डॉलर के वैश्विक प्रभाव पर असर पड़ने की संभावना अमेरिका के लिए चिंता का विषय है।

BRICSK की G7 से तुलना करना सही है ?

G7 मुख्यतः विकसित पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं। वहीं BRICS उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का बड़ा मंच है। BRICS में China, India, Russia, Brazil सहित विस्तारित सदस्य शामिल हैं।

भारत की भूमिका

भारत BRICS का सदस्य होने के साथ अमेरिका और G7 देशों के साथ भी मजबूत संबंध रखता है। इसलिए भारत की नीति किसी एक गुट के साथ खड़े होने के बजाय Strategic Autonomy और राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।

निष्कर्ष

BRICS की सबसे बड़ी ताकत उसका आकार है और सबसे बड़ी चुनौती उसकी विविधता। BRICS के पास बड़ी आबादी, विशाल बाजार, ऊर्जा संसाधन, प्राकृतिक खनिज, कृषि क्षमता और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएँ हैं। लेकिन भारतचीन प्रतिस्पर्धा, रूसपश्चिम तनाव, आर्थिक असमानता, डॉलर निर्भरता और अलगअलग राष्ट्रीय हित इसकी एकता के सामने बड़ी चुनौतियाँ हैं। BRICS और G7 की प्रतिस्पर्धा केवल अर्थव्यवस्था की नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक शक्तिसंतुलन की भी है। BRICS यदि व्यापार, वित्त, तकनीक और Global South में अपना सहयोग मजबूत करता है, तो दुनिया की व्यवस्था और अधिक Multipolar हो सकती है।

भविष्य में BRICS की सफलता इस बात से तय होगी कि वह सिर्फ राजनीतिक घोषणाओं का मंच बनकर रहता है या वास्तव में व्यापार, भुगतान, बैंकिंग, technology, energy और infrastructure का मजबूत सहयोगी नेटवर्क तैयार करता है।

“BRICS का लक्ष्य डॉलर या G7 को तुरंत हटाना नहीं, बल्कि एक ऐसी बहुध्रुवीय (Multipolar) वैश्विक व्यवस्था तैयार करना होना चाहिए, जिसमें Global South की आर्थिक और राजनीतिक आवाज़ अधिक मजबूत हो। दुनिया जिन लातो से वर्तमान मे गुजर रही है यह सम्मेलन बहुत महत्वपूर्ण है अमेरिका इस पर पूरा अपना ध्यान लगाए हुए हैं क्योंकि अमेरिका किसी भी नई करेंसी को दुनिया में आने से रोकने के लिए तैयार है।

Brics के बारे में आपका क्या सोचना है कमेंट बॉक्स में बताएं।

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