AI Impact Summit 2026 में 300 से अधिक दुनियाँ के टॉप CEO का भारत में लग रहा मेला, भारत के लिए क्यों इतना खास है AI Impact Summit, भारत बनेगा दुनियाँ का AI राजा …..

देश की राजधानी नई दिल्ली में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ (India-AI Impact Summit 2026) अपनी तरह का पहला वैश्विक शिखर सम्मेलन है जो ग्लोबल साउथ (Global South) में आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत मंडपम में 16 फरवरी 2026 को  इसका उद्घाटन करेंगे। यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि यह पहली बार है जब भारत इस वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले यह सम्मेलन ब्रिटेन (2023), दक्षिण कोरिया (2024) और पेरिस (2025) में आयोजित हो चुका है। ‘ग्लोबल साउथ’ के किसी देश में इसका आयोजन होना वैश्विक एआई एजेंडा में भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

  1. AI प्रतिभागी: इस 5-दिवसीय कार्यक्रम में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, 45+ देशों के मंत्री और गूगल (संदर पिचाई), ओपनएआई (सैम ऑल्टमैन) तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज (मुकेश अंबानी) जैसी वैश्विक कंपनियों के 40 से अधिक सीईओ शामिल हो रहे हैं।
  2. तीन मुख्य स्तंभ (Sutras) यह शिखर सम्मेलन तीन आधारभूत सिद्धांतों पर केंद्रित है पीपल (People), प्लैनेट (Planet) और प्रोग्रेस (Progress)
  3. वैश्विक भागीदारी: इसमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, यूके, फ्रांस और जर्मनी सहित 13 देशों के विशेष पवेलियन बनाए गए हैं।
  4. अनुसंधान संगोष्ठी (Research Symposium): 18 फरवरी को एआई के प्रभाव पर एक विशेष शोध संगोष्ठी आयोजित की जाएगा  जिसका नॉलेज पार्टनर IIT हैदराबाद है।
  5. इम्पैक्ट चुनौतियां: सम्मेलन के दौरान AI for ALL, AI by HER, और YUVAi जैसी वैश्विक चुनौतियों के विजेताओं के समाधान प्रदर्शित किए जाएंगे।
  6. UPI ‘वन वर्ल्ड’ सेवा: विदेशी प्रतिनिधियों की सुविधा के लिए NPCI ने ‘यूपीआई वन वर्ल्ड’ वॉलेट सेवा शुरू की है, जिससे वे बिना स्थानीय बैंक खाते के भुगतान कर सकेंगे।

समिट का मुख्य उद्देश्य: ‘एक्शन से इम्पैक्ट’

चौथा AI दिल्ली सम्मेलन का मुख्य लक्ष्य एआई को केवल चर्चा या ‘एक्शन’ तक सीमित न रखकर उसके ‘इम्पैक्ट’ (प्रभाव) पर ध्यान केंद्रित करना है। इसके मुख्य बिंदु हैं

  1. नीति से परिणाम तक (Policy to Implementation)
    AI
    से जुड़ी राष्ट्रीय नीतियों को उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और शासन में प्रभावी रूप से लागू करना।
  2. AI का सामाजिक उपयोग (AI for Social Good)
    AI
    का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, ग्रामीण विकास, कृषि सुधार और आपदा प्रबंधन में करना।
  3. स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा
    भारत को AI स्टार्टअप हब बनाना, फंडिंग, इनक्यूबेशन और वैश्विक साझेदारी को प्रोत्साहित करना।
  4. डेटा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना
    सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय डेटा इकोसिस्टम विकसित करना।
  5. कौशल विकास (AI Skilling & Jobs)
    युवाओं को AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस में प्रशिक्षित कर रोजगार के नए अवसर पैदा करना।
  6. एथिकल और जिम्मेदार AI (Responsible AI)
    गोपनीयता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करते हुए जिम्मेदार AI उपयोग को बढ़ावा देना।
  7. वैश्विक नेतृत्व
    भारत कोAI for All” मॉडल के माध्यम से विश्व में एक जिम्मेदार AI नेता के रूप में स्थापित करना।

एआई के फायदे और भारत की पहल

भारत एआई के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए दो बड़े उद्देश्यों पर काम कर रहा है AI भारत की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और शासन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
भारत सरकार की पहलें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि AI का विकास सबके लिए और जिम्मेदारी के साथ हो। स्वदेशी एआई मंच: भारत चाहता है कि वह खुद का एआई प्लेटफॉर्म बनाए ताकि वैश्विक कंपनियों पर निर्भरता कम हो सके। ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत कई महत्वपूर्ण मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: सेमीकंडक्टर मिशन और नए डेटा संरक्षण कानूनों के जरिए भारत एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है। आर्थिक विकास: एआई के जरिए उत्पादकता बढ़ाकर भारत अपनी अर्थव्यवस्था को नई गति देना चाहता है।

AI से चुनौतियाँ और नुकसान (Risks)

​शिखर सम्मेलन में विशेषज्ञों और नीति निर्मा रिपोर्ट के अनुसार एआई के साथ कई गंभीर खतरे भी जुड़े हैं जिनका समाधान जरूरी है:

  • रोजगारपर असर
  • ऑटोमेशन के कारण कई पारंपरिक नौकरियाँ कम हो सकती हैं।
  • कम-कौशल वाले काम सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
    👉समाधान: री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग बहुत जरूरी।
  • 2️डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा
  • AI को बड़े पैमाने पर डेटा चाहिए।
  • व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग या डेटा लीक का खतरा।
    👉 मजबूत डेटा सुरक्षा कानून और साइबर सुरक्षा जरूरी।
  • 3️गलत या पक्षपात पूर्ण निर्णय(Bias)
  • अगर AI को पक्षपाती डेटा पर ट्रेन किया गया, तो निर्णय भी भेदभावपूर्ण हो सकते हैं।
  • भर्ती, लोन, पुलिसिंग जैसे क्षेत्रों में यह गंभीर समस्या बन सकती है।
  • 4️फेकन्यूज और डीपफेक
  • AI से नकली वीडियो, ऑडियो और फोटो बनाए जा सकते हैं।
  • चुनाव, समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
  • 5️मानव नियंत्रण का खतरा
  • अत्यधिक निर्भरता से मानव निर्णय क्षमता कम हो सकती है।
  • स्वायत्त हथियार (Autonomous Weapons) जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जोखिम।
  • 6️⃣साइबर हमले
  • AI का उपयोग हैकिंग और साइबर अपराध में भी हो सकता है।
  • स्मार्ट हमले पहचानना कठिन हो सकता है।
  • 7️नैतिक और कानूनी चुनौतियाँ
  • यदि AI गलत निर्णय ले, तो जिम्मेदार कौन?
  • अभी कई देशों में स्पष्ट कानून नहीं हैं।

भविष्य की जरूरतें और समाधान

भविष्य में एआई को सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने आवश्यक हैं भारत वैश्विक स्तर पर ठोस अंतरराष्ट्रीय नियम और मानक बनाने की मांग कर रहा है ताकि सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

​स्वदेशी विकास: स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स के अनुसार, अमेरिका और चीन इस क्षेत्र में बहुत आगे हैं। भारत को विदेशी तंत्रों पर निर्भरता कम करने के लिए अपने बुनियादी एआई मॉडल विकसित करने होंगे।

​बहुपक्षीय घोषणापत्र: दिल्ली समिट में एक बहुपक्षीय घोषणापत्र जारी होने की उम्मीद है, जो एआई के व्यावहारिक क्रियान्वयन (Implementation) के लिए दिशा-निर्देश तय करेगा।

 निष्कर्ष (Conclusion)

AI के जनक (Father of Artificial Intelligence)

जॉन मैकार्थी (John McCarthy) ने जो सपना देखा था वह इतना बड़ा हो गया है की “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में क्रांति आ गई है इसी लिए AI का जनक” जॉन मैकार्थी को माना जाता है। भारत के लिए यह समिट केवल एक आयोजन नहीं बल्कि एक नई शुरुआत है। दुनिया के सबसे बड़े मुक्त बाजार वाले लोकतंत्र के रूप में भारत के पास AI के वैश्विक नियमों को आकार देने का सुनहरा मौका है। ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के जरिए भारत न केवल अपनी तकनीकी क्षमता दिखाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि एआई का उपयोग मानवता की भलाई और सुरक्षा के लिए हो। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) केवल एक उभरती हुई तकनीक नहीं बल्कि 21वीं सदी की परिवर्तनकारी शक्ति है। यह अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, शासन और सुरक्षा जैसे हर क्षेत्र को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।

भारत के लिए AI एक अवसर है आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की ओर तेज़ कदम बढ़ाने का अवसर है दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के पास यह ऐतिहासिक मौका है कि वह AI के विकास को समावेशी (Inclusive), नैतिक (Ethical) और सुरक्षित (Secure) बनाए।‘AI इम्पैक्ट समिट’ और IndiaAI मिशन जैसी पहलें यह दर्शाती हैं कि भारत केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि नियमों और मानकों को गढ़ने वाला अग्रणी राष्ट्र बनना चाहता है।

AI का वास्तविक उद्देश्य मशीनों को बुद्धिमान बनाना नहीं है बल्कि मानव जीवन को बेहतर, सुरक्षित और अधिक सशक्त बनाना है। यदि सही नीतियों, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ इसे अपनाया जाए तो AI भारत को वैश्विक मंच पर नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है। AI खुद सोचता नहीं हम क्या सोचते है और हमे क्या चाहिए उसके लिए ai काम करता है AI “सोचता” नहीं डेटा के आधार पर पैटर्न पहचानता है AI के पास भावना या चेतना नहीं होती। परंतु मानव भावनात्मक सोचता है जो कभी कभी अपने उदेश्य से भटक जाता है। किसी भी देश को आगे बढ़ने के लिए तकनीकी क्रांति लानी होती है भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बाने की दिशा में चल रहा है इस लिए Ai के क्षेत्र में भारत को विकसित करना होगा।

மறுமொழி இடவும்

உங்கள் மின்னஞ்சல் வெளியிடப்பட மாட்டாது தேவையான புலங்கள் * குறிக்கப்பட்டன