भारत विरोधी गतिविधियों में विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी, विदेशी नेटवर्क का भंडाफोड़, अमेरिकी समेत कई विदेशी पकड़े गए, भारत के पूर्वोत्तर, म्यांमार और बांग्लादेश को मिला कर अलग देश बनाने की साजिस…

भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त विदेशियों के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक सहित छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। आशंका है कि अभी कई अन्य विदेशी नागरिक भारत में छिपे हो सकते हैं, जिनकी तलाश में देश की सभी सुरक्षा एजेंसियाँ जुटी हुई हैं।

इन सभी पर भारत के खिलाफ साजिश रचने और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। मैथ्यू वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन चेकिंग के दौरान संदेह के आधार पर रोका गया। पूछताछ में उसके भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के संकेत मिले, जिसके बाद देशभर में अलर्ट जारी किया गया। इसके बाद तीन-तीन यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया। यह गिरफ्तारी एक गंभीर सुरक्षा चिंता की ओर इशारा करती है। आरोप है कि ये सभी विदेशी नागरिक भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पहुँचकर अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश करते थे और वहाँ के विद्रोहियों को ड्रोन वॉरफेयर, हथियार संचालन और युद्ध तकनीकों की ट्रेनिंग दे रहे थे।

भारत में प्रतिबंधित क्षेत्र (RAP और PAP)

भारत में कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में जाने के लिए विदेशियों को विशेष अनुमति लेनी होती है, जिसे RAP (Restricted Area Permit) और PAP (Protected Area Permit) कहा जाता है। नियम राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और जनजातीय संस्कृति की रक्षा के लिए बनाए गए हैं।

RAP (Restricted Area Permit):
यह परमिट अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक होता है, जैसे:

  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (कुछ विशेष द्वीप)
  • लक्षद्वीप द्वीप समूह

PAP (Protected Area Permit):
यह सीमा से लगे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए आवश्यक होता है, जैसे:

  1. अरुणाचल प्रदेश
  2. सिक्किम (कुछ सीमावर्ती क्षेत्र)
  3. मणिपुर
  4. मिजोरम
  5. नागालैंड

इन क्षेत्रों में बिना अनुमति प्रवेश, फोटोग्राफी या संवेदनशील जानकारी साझा करना दंडनीय है। विदेशी नागरिकों को भारत सरकार/राज्य सरकार या FRRO (Foreigners Regional Registration Office) के माध्यम से पासपोर्ट, वीज़ा और यात्रा विवरण जमा कर अनुमति लेनी होती है।

आरोप और जांच

गिरफ्तार किए गए 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक पर आरोप है कि वे वैध वीज़ा पर भारत आए, लेकिन प्रतिबंधित क्षेत्रों (विशेष रूप से मिजोरम) में अवैध रूप से प्रवेश किया। वहाँ से वे म्यांमार जाकर सशस्त्र जातीय समूहों से संपर्क में थे। इन पर आरोप है कि वे:

  • ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग दे रहे थे
  • हथियार संचालन सिखा रहे थे
  • युद्ध तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहे थे

जांच में यह भी सामने आया है कि इनके कुछ संपर्क भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय प्रतिबंधित संगठनों से भी थे।
गिरफ्तारी के दौरान ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। NIA के अनुसार, ये लोग यूरोप से ड्रोन की खेप भारत के रास्ते म्यांमार भेजने की साजिश में शामिल थे। इनके ट्रैवल रूट, फंडिंग और नेटवर्क की जांच जारी है।

मैथ्यू वैनडाइक कौन है?

मैथ्यू वैनडाइक (Matthew VanDyke) एक अमेरिकी व्यक्ति हैं, जिन्हें आम तौर पर युद्ध क्षेत्रों में सक्रिय रहने, डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने और स्वयंसेवी लड़ाकों को ट्रेनिंग देने के लिए जाना जाता है। वे एक फिल्ममेकर (Documentary Filmmaker) और लेखक हैं, जो संघर्ष (conflict zones) वाले इलाकों में काम करने के लिए प्रसिद्ध हैं।

मैथ्यू वैनडाइक 2011 के लीबिया युद्ध के दौरान गद्दाफी शासन के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों के साथ जुड़ने के कारण करीब 6 महीने तक जेल में रहे। इसके बाद वे ISIS के खिलाफ गतिविधियों से जुड़े और विदेशी स्वयंसेवकों को ट्रेनिंग देने का काम किया। उन्होंने “Sons of Liberty International (SOLI)” नाम का संगठन भी शुरू किया।मैथ्यू वैनडाइक का भारत में रहना इस संदेह को बल देता है कि क्या बाहरी ताकतें भारत की आंतरिक सीमाओं को अस्थिर कर एक नया ‘बफर स्टेट’ बनाने की कोशिश कर रही हैं। यदि विदेशी नागरिक यहाँ के उग्रवादी समूहों को ड्रोन तकनीक और आधुनिक युद्ध कौशल सिखा रहे हैं, तो यह भारतीय सेना के लिए “असममित युद्ध” (Asymmetric Warfare) की चुनौती पेश करता है। यूक्रेन ने अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर विरोध जताया है और उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की है। अमेरिका ने इस मामले पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

पूर्वोत्तर भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों को अलग कर ‘अलग देश’ बनाने की CIA की साजिश (दावा)

पूर्वोत्तर  भारत, विशेष रूप से मिजोरम और मणिपुर, वर्तमान में म्यांमार के गृहयुद्ध और जातीय तनाव के कारण अत्यंत संवेदनशील हैं। पूर्वोत्तर के कई राज्यों (जैसे मिजोरम, नागालैंड, मेघालय) में ईसाई आबादी अधिक है, जिनमें से अधिकांश ऐतिहासिक रूप से ब्रिटिश काल में मिशनरियों के प्रभाव से धर्म परिवर्तन होता आ रहा है।

CIA (Central Intelligence Agency) अमेरिका की खुफिया एजेंसी है जिसके बारे में समय समय पर यह दावा किया जाता है कि पूर्वोत्तर भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों को अलग कर एक “सेपरेट क्रिश्चियन स्टेट” बनाने की योजना हो सकती है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी इसके बारे में कहा गया है कि उन्होंने उल्लेख किया था कि अमेरिका बांग्लादेश में अपना बेस बनाना चाहता था, ताकि पूर्वोत्तर भारत, म्यांमार और बांग्लादेश पर नजर रख सके और भविष्य में रणनीतिक कदम उठा सके।

भारत के पूर्वोत्तर राज्य, म्यांमार और बांग्लादेश लंबे समय से अस्थिर रहे हैं। यह एक संयोग है या किसी बड़े भू-राजनीतिक प्रयोग का हिस्सा—यह समय ही बताएगा। इन क्षेत्रों के बारे में समय-समय पर सोशल मीडिया और कुछ खुफिया रिपोर्टों में चर्चाएँ सामने आती रही हैं। भारत और म्यांमार के बीच लगभग 1600 किमी लंबी खुली सीमा है, जो सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है। म्यांमार में जारी संघर्ष के कारण शरणार्थियों के साथ-साथ उग्रवादियों का आना-जाना भी आसान हो गया है। विदेशी नागरिकों का संरक्षित क्षेत्रों में बिना अनुमति प्रवेश यह संकेत देता है कि स्थानीय नेटवर्क और विदेशी तत्व मिलकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हो सकते हैं।

भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

कुछ चुनौतियाँ जो सामने आती हैं बिना प्रॉफिलिंग के सभी को वीजा देना और सही से जांच न करना विदेशियों को हिम्मत देता है। देश की सुरक्षा एजेंसी सही से काम करे तो ऐसे खतरों को समय से टाला जा सकता है मैथ्यू वैनडाइक जैसे लोगों का भारत में आना और वीजा मिलना यह दर्शाता है सब भगवान भरोसे चल रहा रहा है।

  • आसान वीज़ा नियमों का दुरुपयोग
  • ओवरस्टे (Overstay) के बाद भी विदेशियों का रुकना
  • सभी यात्रियों की रियल-टाइम निगरानी का अभाव
  • होटल बुकिंग (Form C) का सही रिकॉर्ड न होना
  • एयरपोर्ट पर अत्यधिक भीड़ और अधिकारियों पर दबाव होने से आसानी से क्लीरन्स मिलना
  • सुरक्षा कमियों का फायदा उठाकर कुछ विदेशी नागरिक सुरक्षा तंत्र से बच निकलते हैं।
  • इमग्रैशन क्लीरन्स के दौरान सही से जांच का करना

निष्कर्ष

यह घटना भारत के लिए एक चेतावनी है कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। साथ ही, विदेशी नागरिकों की गतिविधियों पर बेहतर निगरानी और सख्त नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।

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