CAPF की सच्चाई,श्रेय IPS को शहादत जवानों की,CAPF सुधार या विवाद? सच्चाई जो सबको जाननी चाहिए, जवानों की पहली पसंद कौन CAPF अधिकारी या IPS?

 

सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 को कानूनी मान्यता दे दी है। यह विधेयक BSF, CRPF, CISF, ITBP और SSB जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के administrative structure और cadre management में बड़े बदलाव लाने के लिए पेश किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 23 मई 2025 को CAPFs के संबंध में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने यह व्यवस्था दी कि CAPF के Group ‘A’ अधिकारी Organized Group A Service (OGAS) का हिस्सा हैं। यह दर्जा न केवल financial benefits (NFFU) के लिए, बल्कि cadre management और promotion जैसे सभी उद्देश्यों के लिए मान्य होगा। IPS deputation में कमी करने के लिए कोर्ट ने निर्देश दिया कि वरिष्ठ पदों (IG रैंक तक) पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अगले दो वर्षों के भीतर “progressively reduce” किया जाए। इसका उद्देश्य CAPF कैडर अधिकारियों के लिए शीर्ष पदों पर पदोन्नति के अधिक अवसर पैदा करना है। परंतु आलोचकों का कहना है कि सरकार IPS संगठन के दबाव में यह बिल लेकर आई है। सरकार भी नहीं चाहती कि CAPF कार्मिकों और अधिकारियों की स्थिति में बड़ा बदलाव आए और उन्हें समय पर promotion मिले। यही कारण है कि यह बिल CAPF के लिए चर्चा का केंद्र बन गया है।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में शीर्ष पदों पर ज्यादातर IPS अधिकारियों का कब्जा है। इससे बल के अधिकारियों को न तो समय पर पदोन्नति मिलती है और न ही अपेक्षित सम्मान। इसी कारण बल के भीतर असंतोष की स्थिति बनी हुई है कि सरकार CAPF के साथ भेदभाव कर रही है। देश के लिए अपने प्राणों की आहुति (sacrifice) CAPF के अधिकारी और जवान देते हैं, जबकि IPS अधिकारी कुछ समय के लिए deputation पर आकर आराम से सेवा पूरी करते हैं और समय पर प्रमोशन लेकर आगे बढ़ जाते हैं। वहीं भारतीय सेना में एक अधिकारी NDA/CDS के माध्यम से भर्ती होकर आगे चलकर सेना प्रमुख (Army Chief) तक बन सकता है, लेकिन CAPF में सहायक कमांडेंट (Assistant Commandant – AC) के रूप में भर्ती होने के बाद भी बहुत कम अधिकारी IG रैंक तक पहुँच पाते हैं। असम राइफल्स में भी अधिकांश शीर्ष पदों पर Army अधिकारियों का प्रभुत्व (dominance) है।

IPS Association की वैधता (legality) पर भी सवाल उठते हैं। Police Forces (Restriction of Rights) Act, 1966 के तहत मंत्रालय इस कानून की धारा 3 का हवाला देता है, जिसके अनुसार पुलिस बल का कोई भी सदस्य केंद्र सरकार की अनुमति के बिना कोई association नहीं बना सकता। हालांकि, IPS Association का तर्क है कि IPS अधिकारी All India Services Act, 1951 के तहत नियुक्त सिविल सेवक हैं, न कि सामान्य “police force” के सदस्य। अब समय आ गया है कि CAPF जवानों और अधिकारियों के लिए भी एक वैध संगठन (valid association) हो, जिससे वे अपने अधिकारों के लिए प्रभावी रूप से आवाज उठा सकें। अगर पूरे CAPF में जवानों का सर्वे किया जाए की जवानों की पहली पसंद कौन CAPF अधिकारी या IPS, तो चौकने वाले जवाब मिलेंगे 90% जवानों का मानना है CAPF अधिकारियों से बेहतर है IPS अधिकारी। 

सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में क्या आदेश दिया था ? समझते है मुख्य बिंदु:

  • संगठित ग्रुपA सेवा (OGAS) का दर्जा मिले, मई 2025 में एक ऐतिहासिक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि CAPF एकसंगठित ग्रुपA सेवा” (OGAS) है। इसका अर्थ है कि इसके अधिकारियों को अन्य केंद्रीय सेवाओं के समान वित्तीय लाभ और करियर प्रगति मिलनी चाहिए।
  • IPS प्रतिनियुक्ति में कटौती हो: अदालत ने निर्देश दिया था कि CAPF में उच्च पदों (जैसे IG और DIG) पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अगले दो वर्षों के भीतर धीरेधीरे कम किया जाए। इससे CAPF के अपने कैडर अधिकारियों के लिए उच्च पदों पर पदोन्नति के रास्ते खुलने थे।
  • कैडर समीक्षा का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को छह महीने के भीतर कैडर की समीक्षा करने और सेवा नियमों में सुधार करने का आदेश दिया था ताकि अधिकारियों को समय पर पदोन्नति मिल सके।
  • विधेयक पर विवाद का कारण: 25 मार्च, 2026 को राज्यसभा में पेश किए गए नए विधेयक का विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि इसमें केंद्र सरकार को ऐसी शक्तियाँ देने का प्रावधान है जो अदालती आदेशों को अधिसूचना के माध्यम से दरकिनार या संशोधित कर सकती हैं।
  • आर्थिक लाभ (NFFU): अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया था कि पात्र अधिकारियों को नॉनफंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन‘ (NFFU) का लाभ मिले, जो कि पदोन्नति में देरी होने पर मिलने वाला आर्थिक लाभ है। 

सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में सरकार की समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए अपने फैसले को बरकरार रखा था। और उपरोक्त आदेश लागू करने का आदेश दिया था सरकार ने CAPF बिल ला कर एक कानूनी मान्यता देना चाहती है जिससे IPS कैडर अधिकारियों की बादशाहत बनी रहे। CAPF कैडर अधिकारी इस विधेयक को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी के रूप में देख रहे हैं। 

CAPF बिल में वर्तमान बदलाव क्या-क्या है?

  1. पदोन्नति और नियुक्तियां:बिल के तहत, महानिरीक्षक (IG) स्तर के 50% पद और अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) स्तर के 67% पद IPS अधिकारियों के लिए प्रतिनियुक्ति से भरने का प्रस्ताव है।
  2. शीर्ष नेतृत्व:स्पेशल डीजी (Special DG) और डीजी (DG) के पद केवल IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है।
  3. विवाद:कैडर अधिकारी समय पर पदोन्नति न मिलने और शीर्ष पदों पर IPS को तरजीह देने का विरोध कर रहे हैं, जिससे यह एक प्रशासनिक और कानूनी मुद्दा बन गया है।
  4. महत्व:यह विधेयक बल के भीतर पारदर्शिता लाने और प्रशासनिक स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है, जो वर्तमान में अलग-अलग नियमों के कारण कोर्ट केसों का सामना कर रहे हैं।

CAPF की भर्ती प्रक्रिया

देश के सभी CAPF बालों में भर्ती होने के लगभग एक जैसी प्रक्रिया है जिसमे मुख्य भर्तियाँ इस प्रकार है :

  1. कांस्टेबल (GD):

  2. यह भर्ती वर्तमान में कर्मचारी चयन आयोग (SSC) के माध्यम से होती है, जिसमें CRPF, Assam Rifles, BSF, ITBP, CISF और SSB जैसे सभी CAPF बलों के लिए सिपाहियों की भर्ती की जाती है। सभी उम्मीदवारों को एक समान recruitment process से गुजरना होता है। अंतिम चयन (final selection) लिखित परीक्षा (written exam) और बल की पसंद (force preference) के आधार पर होता है। CAPF में एक सिपाही को हेड कांस्टेबल बनने में लगभग 15–20 साल का समय लग जाता है।

  3. Sub-Inspector (SI – CPO/SSC):

    Sub-Inspector की भर्ती भी कर्मचारी चयन आयोग (SSC – CPO Exam) के माध्यम से कराई जाती है। इसके तहत CRPF, Assam Rifles, BSF, ITBP, CISF और SSB में SI की भर्ती होती है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस में Sub-Inspector (SI) और CISF में ASI की भर्ती भी इसी प्रक्रिया से होती है। Sub-Inspector से Inspector बनने में सामान्यतः 6–7 वर्ष लग जाते हैं, जबकि Inspector से Assistant Commandant बनना पूरी तरह vacancy पर निर्भर करता है, जिसमें 10 वर्ष या उससे अधिक समय लग सकता है।

  4. सहायक कमांडेंट (Assistant Commandant – AC/GD):

    यह CAPF में Gazetted Officer (Group A) का entry level पद होता है। इसकी भर्ती संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा समय-समय पर आयोजित की जाती है।
    Assistant Commandant से Deputy Commandant (DC) बनने में सामान्यतः 6–7 वर्ष लगते हैं। अधिकारी स्तर पर मुख्य समस्या DIG (Deputy Inspector General) रैंक के बाद आती है, जहाँ promotion opportunities बहुत सीमित हो जाती हैं।

  5. Trade Cadre & Supporting Staff:

    CAPF में Trade Cadre और Supporting Staff की भर्ती अलग-अलग रैंकों पर की जाती है। इनका मुख्य कार्य बलों के सुचारू संचालन के लिए technical और administrative support प्रदान करना होता है। इन्हें मुख्य रूप से Constable (Technical & Tradesmen) कहा जाता है। इसमें डॉक्टर, ड्राइवर, मैकेनिक, फिटर, कारपेंटर, टेलर, मोची, कुक, वाटर कैरियर, धोबी, नाई, सफाई कर्मचारी, राजमिस्त्री, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन और रेडियो ऑपरेटर जैसे विभिन्न ट्रेड शामिल होते हैं।
    कुछ ट्रेड कैडर को छोड़कर, अधिकांश पदों पर promotion growth बहुत सीमित या लगभग न के बराबर है।

CAPF (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) कौन-कौन है?

भारत में 7 मुख्य CAPF हैं कुल कार्मिक (Personnel Strength) 11–12 लाख जवान भारत में कार्यरत हैं।

  1. Assam Rifles (1835) म्यांमार बॉर्डर
  2. CRPF –Central Reserve Police Force (1939) आंतरिक सुरक्षा,नक्सल ऑपरेशन
  3. ITBP – Indo-Tibetan Border Police (1962) चीन बॉर्डर
  4. SSB – Sashastra Seema Bal (1963) नेपाल और भूटान बॉर्डर
  5. BSF – Border Security Force (1965) पाकिस्तान और बांग्लादेश बॉर्डर
  6. CISF – Central Industrial Security Force (1969) एयरपोर्ट, मेट्रो, उद्योग सुरक्षा
  7. NSG – National Security Guard(1984) आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन, VVIP सुरक्षा,

CAPF जवानों के लिए सरकार और अधिकारियों की दोहरी मानसिकता

CAPF कार्मिकों के प्रति सरकार की हमेशा एक double standard (दोहरी मानसिकता) देखने को मिलती है। CAPF और Army, दोनों के अधिकारियों की भर्ती संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से होती है। Army में एक अधिकारी Lieutenant के पद पर भर्ती होकर आगे चलकर Army Chief या CDS (Chief of Defence Staff) तक पहुँच कर देश सेवा करता है। वहीं CAPF में एक Assistant Commandant भर्ती होने के बाद Commandant तक पहुँचने के बाद भी नेक्स्ट promotion के लिए संघर्ष करता रहता है। Assistant Commandant का बल के साथ गहरा ground-level connection होता है और वह कई वर्षों तक जमीनी स्तर (ground level) पर काम करता है। CAPF अधिकारियों को combat skills (युद्ध कौशल) का अनुभव IPS अधिकारियों की तुलना में अधिक होता है। लेकिन यह सच है कि CAPF अधिकारियों के पास field experience अधिक होता है। इसके बावजूद सरकार प्राथमिकता IPS अधिकारियों को ही देती है। इसका एक मुख्य कारण यह है कि बड़े पदों पर IPS अधिकारियों का प्रभाव (influence) अधिक होता है। सरकार को सुझाव देने वाले प्रमुख पदों जैसे IB Chief, National Security Advisor (NSA), DG, DGP रैंक पर IPS अधिकारी ही नियुक्त होते हैं। IPS Association एक संगठित समूह (organized group) के रूप में कार्य करता है और अपने हितों (interests) के लिए सरकार के साथ समन्वय बनाए रखता है। सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन IPS अधिकारियों का प्रभाव देश के प्रमुख संस्थानों में बना रहता है। देश में IPS और non-IPS अधिकारियों के बीच लंबे समय से एक प्रकार का institutional conflict देखने को मिलता है। इसका मुख्य कारण यह है कि कई बार IPS अधिकारी non-IPS अधिकारियों को निम्न स्तर का समझते हैं। एक IPS अधिकारी सामान्यतः यह नहीं चाहेगा कि कोई प्रमोटी (promotee) अधिकारी उच्च पद पर बैठे या उसे उसके अधीन कार्य करना पड़े। यह स्थिति कुछ हद तक उसी प्रकार है जैसे UPSC से भर्ती Assistant Commandant नहीं चाहता कि CPO/SSC  से भर्ती Sub-Inspector प्रमोट होकर उससे वरिष्ठ (senior) बन जाए और उसे उसके अधीन काम करना पड़े।

निष्कर्ष (Conclusion)

CAPF की स्थिति एक Food Chain की तरह हो गई है। जैसे खाद्य श्रृंखला में हर बड़ा जानवर छोटे जानवर को खा जाता है, उसी तरह यहाँ भी हर बड़ा अधिकारी अपने से नीचे रैंक के कर्मियों के साथ भेदभाव करता है। यही स्थिति सैन्य बलों में भी देखने को मिलती है। सहायक कमांडेंट (AC) और प्रमोटी अधिकारी अपने निचले कार्मिकों के साथ भेदभाव करते हैं, लेकिन जब कोई IPS अधिकारी CAPF अधिकारियों के साथ भेदभाव करता है, तो वही लोग विरोध करने लगते हैं। वास्तविकता यह है कि CAPF बलों में जवानों पर सबसे अधिक अत्याचार अक्सर CAPF या प्रमोटी अधिकारियों द्वारा ही किया जाता है। एक जवान 20 साल में हेड कांस्टेबल बने या 30 साल में, इससे किसी को फर्क नहीं पड़ता। जवानों के हिस्से की सुविधाएं जब अधिकारी खुद खा लेते हैं, तब उन्हें न तो शर्म आती है और न ही नियम-कानून याद रहते हैं। CAPF अधिकारी अपने subordinate कार्मिकों को न तो सम्मान देते हैं और न ही उनके अधिकारों के लिए कोई प्रयास करते हैं। लेकिन जब आज बात उनके अपने हितों पर आई है, तो वही CAPF अधिकारी सरकार के सामने विरोध कर रहे हैं।

दूसरी ओर, IPS अधिकारी भी CAPF के हित में बहुत कम सोचते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अक्सर deputation पूरा करना, साल में कोई अच्छा medal लेना, अपने घर पर 5–7 जवान रखना और आराम से नौकरी करना ही माना जाता है। आजादी से लेकर अब तक आतंकवाद और नक्सलवाद से लड़ते हुए कितने IPS शहीद हुए हैं, इसकी संख्या न के बराबर है, जबकि CAPF कार्मिकों और अधिकारियों की शहादत की एक लंबी सूची है। 21वीं सदी में हेमंत करकरे (IPS) को मुंबई आतंकी हमले में शहादत मिली है लेकिन CAPF के शहीदों को गिनना आसान नहीं है। जब भी देश को किसी  भी प्रकार की सुरक्षा की आवश्यकता होती है चाहे वह युद्ध हो, सीमा सुरक्षा, नक्सलवाद, आतंकवाद, बाढ़ आपदा (NDRF), चुनाव या हर स्थिति में CAPF सबसे पहले तैनात होता है। देश को सुरक्षित रखने का काम सैनिक करते हैं, लेकिन श्रेय अक्सर पुलिस को मिलता है, मेडल IPS ले जाते हैं और शहादत CAPF के हिस्से में आती है। असम राइफल्स का डीजी आमतौर पर भारतीय सेना का एक वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल रैंक का अधिकारी होता है वह IPSअधिकारी नहीं है। वहीं भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard – ICG) का सर्वोच्च प्रमुख महानिदेशक (Director General – DGICG) भी आईपीएस नहीं है मतलब प्रमोटी होता है ऐसे ये कहना पूर्णतः गलत होगा की CAPF में DG IPS ही होना चाहिए।

यदि सरकार वास्तव में CAPF अधिकारियों के लिए कुछ करना चाहती है, तो जिस प्रकार PCS से चयनित DSP को एक समय बाद IPS कैडर में शामिल किया जाता है, उसी प्रकार UPSC से चयनित Assistant Commandant को भी IPS कैडर में शामिल किया जा सकता है। इससे CAPF की दिशा और दशा दोनों में सुधार हो सकता है।

यह बिल CAPF में administrative reform नहीं है, बल्कि इससे constitutional issues उत्पन्न हो सकते हैं और देश का federal structure कमजोर हो सकता है। CAPF की भूमिका देश की sovereignty से जुड़ी हुई है। पिछले तीन वर्षों में 50,000 से अधिक कर्मियों ने असंतोष के कारण इस्तीफा दिया है। इसके मुख्य कारण हैं:अत्यधिक कार्यभार (heavy workload) मानसिक तनाव (stress), धीमी पदोन्नति (slow promotion),परिवार को मिलने वाली सुविधाओं की कमी है। CAPF कार्मिकों को आज तक जिम्मेदारी के अलावा कुछ मिलता नहीं है, जबकि लाभ अक्सर पुलिस और IPS को मिलता हैं। सच्चाई यह है कि CAPF के पास सरकार के आदेश मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। विकल्प केवल नौकरी छोड़ने का है, लेकिन क्या इससे समस्या का समाधान होगा? देश में हर व्यक्ति अपने-अपने हितों (interest) के अनुसार निर्णय लेता है। ऐसे नियमों से न तो IPS को फर्क पड़ता है और न ही नेताओं को, क्योंकि सैन्य बलों में अधिकतर भर्ती किसान और मजदूर वर्ग के परिवारों से होती है।

देशभक्ति केवल “भारत माता की जय” कहने से नहीं होती, बल्कि यह सुनिश्चित करने से होती है कि देश सुरक्षित कैसे रहे। देश के नौकरशाह जानते हैं कि गरीबी और बेरोजगारी इतनी अधिक है कि आम आदमी के पास सरकारी नियमों को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। आज सरकारी नौकरी भी कई लोगों के लिए मजबूरी बनती जा रही है। सब कुछ समझते हुए भी आम आदमी को अनजान बनकर रहना पड़ रहा है।

IPS  और UPSC से भर्ती Assistant Commandant में कौन बेहतर है CAPF को चलाने में कमेन्ट मे जरूर बताए ?

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