भारत में इनकम टैक्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) द्वारा संचालित किया जाता है और इसके नियम इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत बनाए गए हैं। इनकम टैक्स (Income tax) एक डायरेक्ट टैक्स है जिसे एक साल में एक बार ही भरा जाता है। जो भी भारत में 2,50000 (2.5 लाख प्रति वर्ष ) से अधिक इनकम करता है टैक्स फाइल करना होता है वह इनकम किसी भी संस्था, कॉर्पोरेट कंपनी, स्थानीय प्राधिकरण, संगठन या सरकारी कर्मचारी जो किसी निश्चित मापदंड को पूरा करते हैं उन्हें कानूनी तौर पर सरकार को टैक्स देना होता है। किसी भी व्यक्ति या कंपनी को ये टैक्स अपनी आय या इनकम पर देना होता है अगर उस वित्त वर्ष (Financial year) में उसकी आय टैक्स के दायरे में आती है। तो वह निर्धारित समय सीमा में टैक्स भरेगा अन्यथा जुर्माना (Fine) के साथ कानूनी कार्यवाही भी हो सकती है। भारत में टैक्स साइकिल (financial year) 1 अप्रैल से शुरू होकर और 31 मार्च को समाप्त होता है। इसके बाद पिछले वर्ष का टैक्स भरना होता हैं भारत में कुछ वर्षों से 31 जुलाई तक टैक्स फाइल करने की समय सीमा है उसके बाद जुर्माना (Fine) के साथ 31 दिसम्बर तक भर सकते हैं। आमबजट 2025 की घोषणा में अब एक साथ पिछले 4 साल तक ITR फाइल कर सकते हैं जो की विलंब शुल्क के साथ भरना होगा।
रिटर्न भरने की अंतिम तारीखें (2025-26 के लिए) https://eportal.incometax.gov.in/iec/foservices/#/login
- नॉन-ऑडिट केस (साधारण व्यक्ति) 31 जुलाई होता है असेसमेंट 2025-26 का ITR भरने की अंतिम तारीख 15 सतंबर 2025 तक थी। 31 दिसम्बर तक लेट फीस के साथ भर सकतें हैं।
- ऑडिट वाले केस (व्यवसायी/कंपनी) 31 अक्टूबर 2025 था ऑडिट केश भी इस बार लेट होंगे।
असेसमेंट ईयर (Assessment Year) क्या होता है ?
- असेसमेंट ईयर वह साल होता है जिसमें आप पिछले वित्तीय वर्ष (Financial Year) की कुल कमाई पर टैक्स रिटर्न भरते हैं।
- असेसमेंट ईयर को समझते हैं 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 के बीच जो भी कमाई की है यह Financial Year 2024–25 कहलाएगा। और इसका Assessment Year 2025–26 होगा।
इनकम टैक्स के प्रकार (Types of Income Tax)
- Indirect Tax वस्तुएँ या सेवाएँ खरीदते समय चुकाया जाता है (जैसे GST)
- Direct Tax जो सीधे व्यक्ति या संस्था से लिया जाता है (जैसे इनकम टैक्स)
Direct Tax के उदाहरण
- Income Tax – व्यक्तिगत आय पर
- Corporate Tax – कंपनियों की आय पर
- Capital Gains Tax – संपत्ति बेचने पर मुनाफे पर
- Securities Transaction Tax (STT) – शेयर बाजार लेनदेन पर
कौन–कौन इनकम टैक्स देता है?
- वेतन प्राप्त कर्मचारी (Salaried Employees)
- व्यवसायी और फ्रीलांसर (Businessmen and Freelancers)
- कंपनियाँ और फर्म (Companies and Firms)
- HUFs (Hindu Undivided Families)
भारत में टैक्स समान दरों पर नहीं लगता बल्कि आय के हिसाब से इनकम टैक्स देना होता है। इसका मतलब कम आय पर टैक्स कम दर और ज्यादा आय पर अधिक टैक्स दर लगता है। वर्तमान में इनकम तक चार्ट को देखते है
1 अप्रैल 2025 (Financial Year2025-26) New Tax Regime टैक्स दरें
| आयकर स्लैब | आयकर दरें |
| 4 लाख रुपये तक | शून्य |
| रु. 4 लाख – रु. 8 लाख | 5% |
| रु. 8 लाख – रु. 12 लाख | 10% |
| 12 लाख रुपये – 16 लाख रुपये | 15% |
| 16 लाख रुपये – 20 लाख रुपये | 20% |
| रु. 20 लाख – रु. 24 लाख | 25% |
| 24 लाख रुपये से अधिक | 30% |
न्यू टैक्स ढांचे के साथ 12 लाख रुपये तक की आय वाले कोई भी व्यक्तिको Tax नहीं देना होगा। वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए 75,000 रुपये की मानक कटौती के कारण 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कर देयता शून्य होगी। Health and Education Cess 4% सेस आपकी कुल टैक्स देनदारी (total income tax) पर लगता है ना कि आपकी कुल आय पर। यह सेस सभी टैक्सपेयर्स पर लागू होता है चाहे आप नया टैक्स रिजीम चुनें या पुराना।
पुरानी कर व्यवस्था और टैक्स की दरें Old Tax Regime, Tax Rates
| आयकर स्लैब | कर की दरें |
| 3 लाख रुपये तक | शून्य |
| 3 लाख – रु. 7 लाख | 5% |
| 7 लाख – रु. 10 लाख | 10% |
| 10 लाख – रु. 12 लाख | 15% |
| 12 लाख – रु. 15 लाख | 20% |
| 15 लाख रुपये से अधिक | 30% |
कितना सरचार्ज लगेगा?
- जो घरेलू कंपनियों टैक्स के लिए सेक्शन 115BAA या सेक्शन 115BAB चुनती हैं उन पर 10% सरचार्ज लगाया जाता है।
- यदि घरेलू कंपनियों की कुल कर योग्य आय 1 करोड़ रुपये से अधिक है तो उन पर 7% का सरचार्ज,10 करोड़ रुपये से अधिक है तो उन पर 12% का सरचार्ज लगता है।
- 50 लाख रु. से 1 करोड़ के बीच: इनकम टैक्स पर 10% सरचार्ज भी लगाया जाएगा।
- 1 करोड़ रु. के ऊपर: इनकम टैक्स पर 15% सरचार्ज लगया जाएगा।
- सीनियर सीटिज़न के लिए ब्याज से होने वाली इनकम पर कर कटौती की लिमिट 50,000 रु से बढ़ाकर 1 लाख रु. कर दिया गया है।
ITR Forms के प्रकार और उनकी उपयोगिता (FY 2024–25 | AY 2025–26)
ITR-1 (सहज)
जिनकी आय केवल निम्न स्रोतों से है
- वेतन या पेंशन
- एक हाउस प्रॉपर्टी से किराया
- ब्याज आदि (अन्य स्रोतों से आय)
- कुल आय ₹50 लाख से कम हो
किनके लिए नहीं ?
- अगर आपने कैपिटल गेन कमाया हो
- अगर एक से अधिक घर की प्रॉपर्टी है
- अगर आप डायरेक्टर हैं या विदेशी आय है
2. ITR-2 जिनकी आय इन स्रोतों से है
- वेतन और पेंशन
- हाउस प्रॉपर्टी (एक से अधिक)
- पूंजी लाभ (Capital Gains)
- विदेशी आय
- निवेश से लाभ
- HUF (Hindu Undivided Family) भी इस फॉर्म का उपयोग कर सकते हैं
किनके लिए नहीं?
- जिनकी आय व्यवसाय या पेशे से आती है (business/profession)
3. ITR-3
- जिनकी आय व्यापार, पेशा या फ्रीलांसर से आती है
- पार्टनरशिप फर्म में पार्टनर हो
- शेयर ट्रेडिंग, फ्रीलांसिंग, या अन्य पेशे से आमदनी हो
शामिल हो सकती है?
- वेतन
- हाउस प्रॉपर्टी
- पूंजी लाभ
- व्यवसायिक या प्रोफेशनल आय
4. ITR-4 (सुगम)
- जिनकी आय Presumptive Scheme के तहत आती है (Section 44AD, 44ADA, 44AE)
- आय ₹50 लाख (प्रोफेशनल) या ₹2 करोड़ (व्यवसाय) से कम हो
- उदाहरण: छोटे दुकानदार, ट्रांसपोर्टर, कंसल्टेंट, आदि
किनके लिए नहीं?
- अगर आप डायरेक्टर हैं या विदेशी आय है
- अधिक जटिल आय स्रोत हैं
5. ITR-5
- Partnership Firms (LLP सहित), AOP, BOI, ट्रस्ट आदि
- Individual इस फॉर्म का उपयोग नहीं कर सकते
6. ITR-6
- Companies (जिन्हें Section 11 के तहत छूट नहीं मिलती)
7. ITR-7
- वे संस्थाएं जो Trust, Religious या Charitable Institutions हैं
- Political Parties, Research Associations आदि
आप और क्या जानना चाहते हैं ?
- कौन सा टैक्स रिजीम आपके लिए बेहतर है?
- कैसे टैक्स कैलकुलेट करें?
- ITR कौन सा फॉर्म भरें?
- डिडक्शन और छूट कैसे पाएं?
Income tax रिटर्न (ITR) क्यों भरना चाहिए? और क्या फाइदे हैं ?
जिस भी व्यक्ति की आय 2.5 लाख से अधिक है इनकम टैक्स के दायरे में आती है उसे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना चाहिए। अगर आपकी उम्र 60 वर्ष से कम है और आपकी आय 12 लाख रु. से कम है, तो आपको इनकम टैक्स भरने की आवश्यकता नहीं है। ऐसा देखा गया है कि कई नौकरीपेशा व्यक्ति ये सोचते हैं कि उनकि सैलरी से TDS काट लिया गया है इसलिए उनकी ज़िम्मेदारी खत्म हो गयी।
इनकम टैक्स रिटर्न भरना और इनकम टैक्स जमा करना, ये दोनों अलग काम है। अगर आप टैक्स के दायरे में नहीं आते हैं, तब भी आपको आयकर रिटर्न भरना चाहिए। आयकर रिटर्न भरने के कई लाभ होते हैं टैक्स रिटर्न भरने के मुख्य फ़ाईदे और किसको ITR भरना चाहिए
- किसी भी प्रकार का लोन आसानी से मिल जाता है
- VISA (विदेश जाने के लिए) लगवाने के लिए रिटर्न भरना अनिवार्य है
- अचल संपत्तियों का तुरंत रजिस्ट्रेशन संभव है
- इनकम टैक्स रिटर्न जमा करने से आयकर विभाग के साथ एक रिकॉर्ड स्थापित करने में मदद मिलती है
- इनकम टैक्स रिटर्न भरने से संपती की घोषणा हो जाती है जिससे भविष्य में किसी बड़े लेंन देंन में फसने पर समस्याओं से बचा जा सकता है।
- यदि करदाता की कर देयता शून्य है तब भी आईटीआर दाखिल किया जा सकता है
- कोई भी व्यक्ति जिसकी विदेशी आय है या जो विदेशी परिसंपत्तियां रखता है उसे अनिवार्य रूप से आय और परिसंपत्तियों का विवरण बताते हुए आईटीआर दाखिल करना आवश्यक है।
- चालू खातों में 1 करोड़ रुपए या उससे अधिक जमा किया है तो ITR रिटर्न दाखिल करना होगा।
- कोई भी करदाता जिसने एक या एक से अधिक बचत खातों में 50 लाख रुपये जमा किए हैं, उसे कर रिटर्न दाखिल करना होगा।
- यदि कोई व्यक्ति एक वर्ष के दौरान विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक खर्च किया है तो उसे ITR दाखिल करना होगा।
- एक लाख रुपये से अधिक बिजली खर्च वाले करदाता को आईटीआर दाखिल करना होगा।
- सामान्य करदाता 25,000 रुपये वरिष्ठ नागरिकों 50,000 रुपये या उससे अधिक टीडीएस/टीसीएस कटा है तो आईटीआर भरना होगा।
- ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया के लिए बैंकों को कम से कम पिछले 2 वर्षों का ITR चाहिए होता है। ITR करदाता द्वारा अर्जित आय और उसकी वित्तीय स्थिति का प्रमाण होता है।
जुर्माने से बचें
- ITR भर कर सरकार को अपनी आय की घोषणा करते हैं।
- जब आप इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं तो वो आपकी कमाई का सबूत होता है जिस पर आपने टैक्स भरा है।
- आयकर अधिनियम के अनुसार हर साल ITR भरना अनिवार्य है।
- ITR ना भरने से गंभीर मुसीबत हो सकती है आयकर विभाग आपको टैक्स डिफ़ॉल्टर मान सकता है।
- इनकम टैक्स विभाग आप पर जुर्माना लगा सकता है।
- अगर आपने ज़रूरत से ज्यादा टैक्स भर दिया है तो आपको अतिरिक्त रकम वापस मिल जाएगी।
कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
- वर्ष 2006-07 में पहली बार आयकर विभाग द्वारा ई-फाइलिंग सुविधा शुरू की गयी थी।
- आप अपना आयकर रिटर्न यहाँ ई-फाइल कर सकते है https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/
- वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (जन्म 18 अगस्त 1959)है जो एक भारतीय अर्थशास्त्री राजनीतिज्ञ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता हैं, जो 2019 से भारत सरकार के वित्त मंत्री और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री के रूप में कार्यरत हैं
- स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री के. शानमुखम चेट्टी थे जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से 17 अगस्त 1948 तक इस पद पर कार्य किया।
- हिंदी और अंग्रेजी में एक साथ यह परंपरा 1955 से शुरू हुई जब बजट पहली बार अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों में प्रस्तुत किया गया।
- बजट को अंग्रेजी में “Budget” कहा जाता है। यह शब्द फ्रेंच शब्द “Bougette” से आया है, जिसका अर्थ होता है छोटा थैला।

income tax refund kab ayega ?
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