इबोला (Ebola) बुंदीबुग्यो (Bundibugyo) वायरस महामारी पर WHO ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, येलो कार्ड अनिवार्य. पूरी रिपोर्ट…

इबोला (Ebola) एक अत्यंत घातक, जानलेवा और संक्रामक वायरल बुखार है। यह संक्रमित जानवरों या मनुष्यों के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। यह बीमारी आंतरिक और बाह्य रक्तस्राव (Bleeding) का कारण बन सकती है। इसके शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं, लेकिन यह बीमारी बहुत अधिक गंभीर रूप ले सकती है। यह संक्रमित व्यक्ति या जंगली जानवरों के शारीरिक तरल पदार्थोंजैसे खून, पसीना, लार, पेशाब, मल, वीर्य और स्तन के दूधके संपर्क में आने से फैलता है।

बुंदीबुग्यो (Bundibugyo) वायरस इबोला वायरस की प्रमुख प्रजातियों में से एक है। इबोला वायरस सबसे पहले वर्ष 1976 में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (तत्कालीन ज़ैरे) और सूडान में सामने आया था। इसका नामकरण कांगो की इबोला नदी के आधार पर किया गया। बुंदीबुग्यो (Bundibugyo) इबोला वायरस का नाम युगांडा के बुंदीबुग्यो प्रांत के नाम पर रखा गया है, जहाँ 2007-2008 में इसकी पहली बार पहचान हुई थी। इसकी मृत्यु दर काफी अधिक मानी जाती है। यदि आपको लगता है कि आप इबोला के संपर्क में आए हैं और लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में फैल रही बुंडिबुग्यो वायरस (Bundibugyo Virus) से होने वाली इबोला बीमारी को 17 मई 2026 कोअंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल” (Public Health Emergency of International Concern – PHEIC) घोषित कर दिया है। हालांकि WHO ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिति अभीPandemic Emergency” की श्रेणी में नहीं आती।

इबोला (Ebola) के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

संक्रमण के 2 दिन से 3 सप्ताह के भीतर लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे:

  1. तेज बुखार
  2. ठंड लगना
  3. अत्यधिक कमजोरी
  4. सिरदर्द
  5. मांसपेशियों में दर्द
  6. गले में खराश
  7. भूख कम लगना

गंभीर लक्षण, कुछ दिनों बाद बीमारी गंभीर रूप ले सकती है:

  1. खून की उल्टी
  2. खून वाला दस्त
  3. शरीर पर लाल धब्बे
  4. आंखें लाल होना
  5. शरीर में रक्तस्राव
  6. भ्रम और बेहोशी

अंतिम चरण में खतरे

  1. अंग फेल होना
  2. मस्तिष्क में सूजन
  3. दौरे पड़ना
  4. शॉक की स्थिति
  5. मृत्यु का खतरा

बुंडिबुग्यो वायरस क्या है?

बुंडिबुग्यो वायरस इबोला वायरस की एक प्रजाति है, जो तेज बुखार, उल्टी, कमजोरी, आंतरिक रक्तस्राव और अंग विफलता (Organ Failure) जैसे गंभीर लक्षण पैदा कर सकती है। इसकी मृत्यु दर भी काफी अधिक मानी जाती है।

इबोला से प्रभावित प्रमुख देश (Ebola Affected Countries) इबोला वायरस मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों में फैलता रहा है। अलगअलग समय पर कई देशों में इसके प्रकोप देखे गए हैं।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC)

यह वह देश है जहाँ 1976 में पहली बार इबोला की खोज की गई थी। तब से लेकर अब तक यहाँ कई बड़े प्रकोप सामने चुके हैं। हाल ही में इसके इटुरी (Ituri) प्रांत में फिर से मामले सामने आए हैं। गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन इन पश्चिमी अफ्रीकी देशों में 2013 से 2016 के बीच इबोला का सबसे बड़ा और घातक प्रकोप देखा गया था, जिसके कारण हजारों लोगों की मौत हुई थी।

वर्तमान में इबोला वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश और मौजूदा स्थिति

  1. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC)
  • 8 प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए मामले
  • 246 संदिग्ध मामले
  • 80 संदिग्ध मौतें

संक्रमण मुख्य रूप से इटुरी प्रांत के निम्न क्षेत्रों में फैला है:

  • बुनिया (Bunia)
  • रवामपारा (Rwampara)
  • मोंगब्वालू (Mongbwalu)
  1. युगांडा (Uganda)

राजधानी कम्पाला में 15 और 16 मई को 2 पुष्ट मामले सामने आए। इनमें 1 व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है। दोनों संक्रमित व्यक्ति कांगो से यात्रा करके आए थे। इस कारण अफ्रीका के पड़ोसी देशों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।

इबोला प्रभावित हो चुके प्रमुख देश

मध्य और पश्चिम अफ्रीका

  • गिनी (Guinea)
  • लाइबेरिया (Liberia)
  • सिएरा लियोन (Sierra Leone)
  • नाइजीरिया (Nigeria)
  • सेनेगल (Senegal)
  • माली (Mali)

मध्य अफ्रीका

  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC)
  • युगांडा (Uganda)
  • दक्षिण सूडान (South Sudan)
  • गैबॉन (Gabon)
  • रिपब्लिक ऑफ कांगो (Republic of Congo)
  • कैमरून (Cameroon) — संदिग्ध/जोखिम क्षेत्र
  • सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक

यात्रा के दौरान क्या सावधानियां रखें?

  1. संक्रमित व्यक्ति या मरीज के संपर्क से बचें।
  2. भीड़भाड़ और असुरक्षित अस्पतालों से दूरी रखें।
  3. हाथों को बारबार साबुन या सैनिटाइज़र से साफ करें।
  4. मास्क और अन्य सुरक्षा उपाय अपनाएं।
  5. जंगली जानवरों या उनका मांस खाने से बचें।

यदि 21 दिनों के भीतर निम्न लक्षण दिखाई दें:

  • बुखार
  • कमजोरी
  • उल्टी
  • खून बहना

तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें।

Generated image: इबोला वायरस: जागरूकता और बचाव

येलो कार्ड (Yellow Card) क्या है ?

येलो कार्ड (Yellow Card), जिसे आधिकारिक तौर परइंटरनेशनल सर्टिफिकेट ऑफ वैक्सीनेशन या प्रोफिलैक्सिस” (International Certificate of Vaccination or Prophylaxis – ICVP) कहा जाता है, WHO द्वारा जारी किया गया एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल पासपोर्ट है। यह मुख्य रूप से येलो फीवर (Yellow Fever) से बचाव का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाण पत्र होता है।

यदि आप अफ्रीका या दक्षिण अमेरिका के उन देशों में जा रहे हैं जहाँ येलो फीवर का खतरा हैजैसे नाइजीरिया, केन्या, ब्राजील, घाना आदितो यह कार्ड आवश्यक हो सकता है।

यदि आप इन प्रभावित देशों से यात्रा करके भारत या किसी अन्य गैरप्रभावित देश में लौट रहे हैं, तब भी Yellow Fever कार्ड दिखाना आवश्यक हो सकता है।

What is the Yellow Fever card & Rule?

वैधता (Validity)

  • यह टीका लगवाने के 10 दिन बाद मान्य होता है।
  • इसकी वैधता जीवन भर के लिए होती है।

अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई देशों की यात्रा से पहले आव्रजन नियमों के तहत इस कार्ड को दिखाना अनिवार्य होता है, ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।

Yellow Card नहीं होने पर भारत में प्रवेश (Entry) से मना किया जा सकता है या यात्री को हवाई अड्डे पर रोककर APHO (Airport Health Organisation) द्वारा 6 दिनों के अनिवार्य क्वारंटीन (Isolation) में भेजा जा सकता है।

विशेष छूट (NOTE-9 महीने से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कुछ विशेष बीमारियों से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह पर इस टीके से छूट मिल सकती है। हालांकि इसके लिए आधिकारिकExemption Certificate” होना जरूरी है।)

निष्कर्ष

इबोला वायरस आज भी दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में से एक माना जाता है। कांगो और युगांडा में फैला वर्तमान प्रकोप यह दिखाता है कि कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था, सीमापार आवाजाही और देर से पहचान किसी भी संक्रमण को तेजी से गंभीर संकट में बदल सकती है। WHO द्वारा इसे अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करना इस बात का संकेत है कि दुनिया को सतर्क और तैयार रहने की आवश्यकता है। हालांकि अभी इस बीमारी को वैश्विक महामारी (Pandemic) नहीं माना गया है, फिर भी संक्रमण को रोकने के लिए निगरानी, समय पर जांच, आइसोलेशन, सुरक्षित यात्रा नियम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी हैं। लोगों में जागरूकता, स्वच्छता और सावधानी ही इबोला जैसी घातक बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

नई दिल्ली में 28 से 31 मई 2026 को होने वाले चौथे भारतअफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन (IAFS-IV) को अफ्रीका के कुछ हिस्सों में फैल रहे इबोला वायरस के खतरे को देखते हुए स्थगित (Postpone) कर दिया गया है। आशंका जताई जा रही है कि अफ्रीका से आने वाले लोगों के माध्यम से संक्रमण भारत तक फैल सकता है। इसलिए सभी देशों को सतर्क रहने और स्वास्थ्य निगरानी मजबूत करने की आवश्यकता है।

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